Sarvarth Siddhi Yog: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर आस्था के प्रमुख केंद्र काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा करने वाले हैं। इस बार उनकी यह पूजा Sarvarth Siddhi Yog में हो रही है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले इस विशेष समय का चयन अपने आप में काफी अहम माना जा रहा है।
क्या होता है सर्वार्थ सिद्धि योग?
Sarvarth Siddhi Yog हिंदू ज्योतिष का एक अत्यंत शुभ योग है। इसका मतलब है वह समय जब किया गया सारा काम सफलता (सिद्धि) की ओर बढ़ता है।
- सर्वार्थ यानी हर प्रकार का उद्देश्य
- सिद्धि यानी उसकी पूर्णता
इसलिए Sarvarth Siddhi Yog को ‘हर काम में सफलता देने वाला योग’ भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस समय किए गए कार्यों में बाधाएं कम आती हैं और सफलता मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
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कैसे बनता है सर्वार्थ सिद्धि योग?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार Sarvarth Siddhi Yog का निर्माण सप्ताह के दिन (वार) और नक्षत्र के विशेष संयोग से होता है। जब किसी दिन का स्वामी ग्रह और उस समय का नक्षत्र अनुकूल स्थिति में होते हैं, तब यह योग बनता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि Sarvarth Siddhi Yog पूरे दिन नहीं रहता, यह सिर्फ कुछ घंटों के लिए होता है। इसका समय पंचांग से तय होता है। इसलिए, इस योग के दौरान किए गए काम खास तौर पर शुभ माने जाते हैं।
क्यों खास है पीएम मोदी की पूजा का समय?
29 अप्रैल को Sarvarth Siddhi Yog के साथ त्रयोदशी तिथि का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में नरेंद्र मोदी का इस समय पूजा करना धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री करीब 30 मिनट तक मंदिर में रहकर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे, जिससे इस Sarvarth Siddhi Yog की महत्ता और बढ़ जाती है।
त्रयोदशी तिथि का धार्मिक महत्व
त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। इस दिन शिव पूजा करने से:
- जीवन में सुख-समृद्धि आती है
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- मनोकामनाएं पूरी होती हैं
जब त्रयोदशी और Sarvarth Siddhi Yog एक साथ आते हैं, तो यह संयोग और भी ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन पूजा को अत्यंत फलदायक बताया गया है।
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षोडशोपचार पूजा क्या होती है?
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की जाने वाली पूजा षोडशोपचार विधि से होगी, जो हिंदू धर्म की सबसे पूर्ण और शास्त्रीय पूजा पद्धतियों में से एक है। ‘षोडशोपचार’ का अर्थ है 16 प्रकार से भगवान की सेवा और आराधना करना। इसमें शामिल हैं –
- आह्वान (देवता को आमंत्रित करना)
- आसन देना
- स्नान (पंचामृत और जल से अभिषेक)
- वस्त्र और यज्ञोपवीत अर्पित करना
- चंदन और पुष्प चढ़ाना
- बिल्वपत्र अर्पण
- नैवेद्य (भोग) लगाना
- आरती और मंत्रोच्चार
इस पूरी प्रक्रिया में श्रद्धा और विधि का विशेष महत्व होता है, जिससे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
Sarvarth Siddhi Yog में क्या करें?
ज्योतिष के अनुसार Sarvarth Siddhi Yog में ये कार्य करना शुभ माना जाता है:
- नई शुरुआत (बिजनेस, नौकरी, प्रोजेक्ट)
- निवेश या आर्थिक निर्णय
- पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य
- महत्वपूर्ण जीवन निर्णय
यह योग सफलता की संभावना को बढ़ाता है, इसलिए इसे ‘सर्वसिद्धि का समय’ भी कहा जाता है।
क्यों बन रहा है यह पूजा खास चर्चा का विषय?
नरेंद्र मोदी की हर धार्मिक यात्रा का एक राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व भी होता है। ऐसे में Sarvarth Siddhi Yog में काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करना कई संकेत देता है, जैसे –
- आस्था और परंपरा से जुड़ाव
- शुभ समय का चयन
- महत्वपूर्ण घटनाओं से पहले आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करना
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