Premanand Maharaj Statement: भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य के बाद अब प्रेमानंद महाराज चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सामने आया है, जिसमे वह महिलाओं को लेकर एक ऐसी बात कही है, जिसके बाद पुरे देश में तहलका मच गया है।
दरअसल कुछ समय पहले भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य ने महिलाओं को लेकर कहा था कि ”आज कल 25 साल की लड़कियां लिविंग में रहती हैं और 4 जगह मुँह मारती हैं।” इस बयान के बाद अब प्रेमानन्द महाराज का महिलाओं को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया था संज्ञान
भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य ने महिलाओं के खिलाफ एक ऐसी टिप्पणी की थी, जो सोशल मीडिया पर कई दिनों तक चर्चा में बनी रही। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस पर संज्ञान लिया था।

Premanand Maharaj Statement: आज के युवाओं पर उठाया सवाल
अब प्रेमानंद महाराज ने भी महिलाओं को लेकर मिलती-जुलती टिप्पणी (Premanand Maharaj Statement) की है। उन्होंने कहा कि ”आज के समय में 100 में से सिर्फ 2-4 लड़कियां ही पवित्र बची हैं।” उन्होंने आगे कहा कि आजकल के यूवा गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड के रिश्तों में उलझे हुए हैं, जिसके कारण धीरे-धीरे पवित्रता खत्म हो रही है।
संत प्रेमानंद जी महाराज का विवादित बयान वायरल
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज ने कहा, “आज 100 में से सिर्फ 2-4 लड़कियां ही पवित्र हैं,” जिससे सोशल मीडिया पर विवाद भड़क उठा। उनके बयान को सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया जा रहा है।#PremanandMaharaj pic.twitter.com/hkNOU2dnJk
— Kushagra Upadhyay (@KushagraUp7958) July 29, 2025
प्रेमानंद महाराज द्वारा ऐसे आज कल की महिलाओं को अपवित्र कहना एक बड़े विवाद को जन्म देना है। भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य का मामला अभी सुलझा ही नहीं था कि अब प्रेमानंद महाराज का यूं 100 में से सिर्फ 2-4 लड़कियां ही पवित्र कहना संतों पर सवाल बन गया है। लोगो का कहना है कि आज कल संतों को हो क्या गया है, कथा की जगह किन विवादों में उलझे हुए हैं।
Premanand Maharaj Statement: प्रेमानंद महाराज के बयान पर कड़ी निंदा
प्रेमानंद महाराज के बयाान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों द्वारा कड़ी निंदा की गई है। महिला संगठनों का कहना है कि इस तरह के बयान महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है। इतना ही नहीं लैंगिक समानता को कमजोर भी करती है।



