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Lokhitkranti > राष्ट्रीय > RSS News: संघ की सोच में बड़ा बदलाव? मोहन भागवत के बयान ने विपक्ष और समर्थकों को किया आमने-सामने
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RSS News: संघ की सोच में बड़ा बदलाव? मोहन भागवत के बयान ने विपक्ष और समर्थकों को किया आमने-सामने

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-02-08 8:33 अपराह्न
By Lokhit Kranti 6 महीना ago
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Mohan Bhagwat RSS Statement
RSS News: संघ की सोच में बड़ा बदलाव? मोहन भागवत के बयान ने विपक्ष और समर्थकों को किया आमने-सामने
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Mohan Bhagwat RSS Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का हालिया बयान सिर्फ एक संगठनात्मक टिप्पणी नहीं, बल्कि भारतीय समाज, राजनीति और संस्कृति को लेकर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। संघ प्रमुख बनने को लेकर उनकी स्पष्टता ने वर्षों से चले आ रहे आरोपों, आशंकाओं और बहसों को फिर से केंद्र में ला दिया है।

Contents
Mohan Bhagwat RSS Statement: संघ प्रमुख बनने की योग्यता पर खुला संदेशMohan Bhagwat RSS Statement: क्या जाति और क्षेत्र की राजनीति से ऊपर उठ रहा है RSS?Mohan Bhagwat RSS Statement: संघ में चुनाव नहीं, सहमति से नेतृत्वMohan Bhagwat RSS Statement: अंग्रेजी भाषा पर भी साफ रुखMohan Bhagwat RSS Statement: भाषा सिर्फ संवाद नहीं, संस्कृति की आत्माMohan Bhagwat RSS Statement: राजनीतिक मायनों में कितना बड़ा है यह बयान?Mohan Bhagwat RSS Statement: समर्थक बनाम विपक्ष – दो ध्रुवीय प्रतिक्रियाएंMohan Bhagwat RSS Statement: आगे की दिशा क्या होगी?

मोहन भागवत ने साफ शब्दों में कहा कि RSS में नेतृत्व किसी जाति, भाषा, क्षेत्र या वर्ग से तय नहीं होता। कोई भी हिंदू, जो संघ के विचारों को समझता है, अपनाता है और वर्षों तक संगठन के लिए समर्पित रहता है, वह इस जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है। यह बयान उस समय आया है जब RSS पर अक्सर ‘सीमित वर्गों तक सिमटा संगठन’ होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

Mohan Bhagwat RSS Statement: संघ प्रमुख बनने की योग्यता पर खुला संदेश

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि RSS में कोई शॉर्टकट नहीं होता। संघ प्रमुख बनने की प्रक्रिया वर्षों की सेवा, अनुशासन और वैचारिक प्रतिबद्धता से गुजरती है।

यह बयान उन आलोचनाओं का सीधा जवाब माना जा रहा है, जिनमें कहा जाता रहा है कि RSS में ऊंचे पद कुछ खास सामाजिक वर्गों तक सीमित रहते हैं।

Mohan Bhagwat RSS Statement: क्या जाति और क्षेत्र की राजनीति से ऊपर उठ रहा है RSS?

भागवत ने कहा कि RSS किसी जाति या समुदाय का संगठन नहीं, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज का प्रतिनिधि मंच है। उनका कहना था कि संघ का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि पहचान की राजनीति के जरिए बांटना।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सामाजिक समरसता को लेकर संघ की रणनीति को साफ तौर पर दर्शाता है, खासकर ऐसे समय में जब जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में गर्म हैं।

Read : संघ के 100 वर्षों पर आत्ममंथन और नए विचारों की झलक, ‘ब्राह्मण होना योग्यता नहीं’, जाति से भाषा विवाद तक बोले मोहन भागवत

Mohan Bhagwat RSS Statement: संघ में चुनाव नहीं, सहमति से नेतृत्व

संघ प्रमुख के चयन को लेकर उठते सवालों पर मोहन भागवत ने कहा कि RSS में चुनावी राजनीति जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां नेतृत्व संगठनात्मक सहमति, अनुभव और सेवा के आधार पर उभरता है।

उन्होंने कहा कि संघ में व्यक्ति नहीं, विचार महत्वपूर्ण होता है। यही कारण है कि संघ का नेतृत्व हमेशा पर्दे के पीछे रहकर काम करता है, न कि राजनीतिक प्रचार के केंद्र में।

Mohan Bhagwat RSS Statement: अंग्रेजी भाषा पर भी साफ रुख

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने अंग्रेजी भाषा को लेकर भी स्पष्ट विचार रखे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी कोई दुश्मन नहीं है, लेकिन अपनी मातृभाषा या भारतीय भाषाओं को हीन समझना मानसिक गुलामी का प्रतीक है।

भागवत के अनुसार, अंग्रेजी को ज्ञान और वैश्विक संवाद का माध्यम बनाया जा सकता है, लेकिन पहचान का आधार भारतीय भाषाएं ही होनी चाहिए।

Mohan Bhagwat RSS Statement: भाषा सिर्फ संवाद नहीं, संस्कृति की आत्मा

संघ प्रमुख ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की संस्कृति, परंपरा और सोच की आत्मा होती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिकता और वैश्विक मंच पर आगे बढ़ें, लेकिन अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से कटें नहीं।

यह बयान नई शिक्षा नीति, हिंदी-अंग्रेजी विवाद और क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर चल रही बहसों के संदर्भ में भी बेहद अहम माना जा रहा है।

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Mohan Bhagwat RSS Statement: राजनीतिक मायनों में कितना बड़ा है यह बयान?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोहन भागवत का यह बयान 2024 के बाद के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य से भी जुड़ा हो सकता है। RSS का यह रुख उन वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश माना जा रहा है, जो अब तक खुद को संघ से दूर महसूस करते थे। विशेषकर युवा, पिछड़े वर्ग और गैर-हिंदी भाषी समाज को जोड़ने के संकेत इस बयान में साफ दिखाई देते हैं।

Mohan Bhagwat RSS Statement: समर्थक बनाम विपक्ष – दो ध्रुवीय प्रतिक्रियाएं

संघ समर्थकों ने इस बयान को समावेशी, प्रगतिशील और समय के अनुरूप बदलाव करार दिया है। वहीं विपक्षी दलों ने इसे ‘इमेज बिल्डिंग’ और ‘रणनीतिक बयानबाज़ी’ बताया है। हालांकि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इसे RSS के भीतर बदलती सोच और खुलेपन का संकेत मान रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इसे RSS के भीतर बदलती सोच और खुलेपन का संकेत मान रहे हैं।

Mohan Bhagwat RSS Statement: आगे की दिशा क्या होगी?

मोहन भागवत के बयान से यह स्पष्ट है कि RSS खुद को बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल के अनुसार ढालने की कोशिश कर रहा है। नेतृत्व, भाषा और सामाजिक समरसता को लेकर यह खुलापन आने वाले वर्षों में संघ की भूमिका को और व्यापक बना सकता है। अब सवाल यह नहीं है कि संघ बदलेगा या नहीं, बल्कि यह है कि यह बदलाव जमीन पर कितना दिखाई देगा।

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