Mansa Devi Stampede: उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में रविवार सुबह मची भगदड़ में 8 लोगों की मौत हो गई और लगभग 30 लोग घायल हो गए। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद पूरे देश के लोगों में डर का माहौल है।
भगदड़ों का इतिहास
यह पहली बार नहीं है, भारत का इतिहास बड़े हादसो और भगदड़ो से भरा हुआ रहा है। सन् 1954 में आयोजित प्रयाग कुंभ मेले में हुई भगदड़ में लगभग 500 से 800 लोगों ने अपनी जान गवाई। सन् 2005 में महाराष्ट्र के मंधरा देवी मंदिर में हुई भगदड़ में लगभग 291 हिन्दू श्रृद्धालुओं की मृत्यु हुई। 2010 में प्रतापगढ़ में रामझांकी के दौरान हुई भगदड़ में 71 लोगों की मृत्यु हुई। 2011 में केरला के सबरी माला मंदिर में 102 लोगों की मृत्यु हुई और 2013 मध्यप्रदेश में नवरात्रि के दौरान हुई भगदड़ में लगभग 115 लोगों की मृत्यु हुई जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए।

2020 के बाद की बड़ी भगदड़ें
सन् 2024 में हातरस में आयोजित नरायण सरकर हरी (भोले बाबा) की कथा के दौरान हुई भगदड़ में 120 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई। जहां 5000 लोगों की स्थान पर 15000 लोग एकत्रित हो गये। जिसमें सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों ने अपनी जान गवाई। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में ऐसे कई गुरु हैं जिनके लाखों और करो़ड़ों में अनुयायी हैं। जो इंस्टाग्राम, फेसबुक पर प्रचलित न होकर भी लाखों लोगों के दिल में अपनी जगह बनाये रखते हैं।
Mansa Devi Stampede : इससे पहले भी 2022 में इनकी कथा में 50 लोगों के स्थान में 5000 लोग एकत्रित हो गये थे, जिसके बाद शहर की पूरी यातायात व्यवस्था भंग हो गई। 2024 में अल्लूअर्जुन की पुष्पा-2 के रिलिज के दौरान भगदड़ में 35 साल की एक महिला को अपनी जान गवानी पड़ी। 2025 के महाकुंभ में 30 लोगों की मृत्यु हुई। इसके बाद दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 18 लोगों ने अपनी जान गवाई।
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Mansa Devi Stampede : भारत में लाखों लोगों ने गवाई भगदड़ में अपनी जान, जानिए क्या कहते हैं आकड़े pic.twitter.com/hd4gDEAFQZ
— Lokhit Kranti News (@KrantiLokh53958) July 29, 2025
आज के वक्त में इस तरह की घटनाएं देश की व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल उठाती हैं।
लेखक : बिनी शर्मा
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