Girls Hostel Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2026-27 में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए एक अहम घोषणा की है। सरकार ने देश के हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल (Girls Hostel Budget 2026) बनाने का फैसला किया है। यह कदम उन छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें पढ़ाई या नौकरी के लिए अपने जिले से बाहर जाना पड़ता है लेकिन सुरक्षित और किफायती आवास की कमी से जूझना पड़ता है। सरकार का मानना है कि आवास की समस्या दूर होने से महिलाओं की शिक्षा और रोजगार में भागीदारी दोनों मजबूत होंगी।
Read More: आयुर्वेद की ग्लोबल उड़ान, बजट में नए संस्थान और रिसर्च पर फोकस
किसे मिलेगा गर्ल्स हॉस्टल में आवास?
- बजट में साफ किया गया है कि इन गर्ल्स हॉस्टल का लाभ केवल छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा।
- हायर एजुकेशन की छात्राएं, जो कॉलेज या यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के लिए अपने जिले या राज्य से बाहर जाती हैं
- दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से आने वाली लड़कियां, जिनके लिए रोजाना आना-जाना संभव नहीं
- कामकाजी महिलाएं, जो नौकरी के लिए दूसरे जिले में रहती हैं
- इन सभी वर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराया जाएगा।

छात्राओं के लिए क्यों है यह फैसला अहम?
अभी देश के कई जिलों में गर्ल्स हॉस्टल (Girls Hostel Budget 2026) की सुविधा नहीं है। ऐसे में छात्राओं को रोजाना 40 से 50 किलोमीटर तक सफर करना पड़ता है या फिर मजबूरी में निजी पीजी और किराए के कमरों में रहना पड़ता है, जहां सुरक्षा और सुविधाओं की गारंटी नहीं होती। हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनने से-
- छात्राओं को सुरक्षित माहौल मिलेगा
- पढ़ाई पर फोकस बढ़ेगा
- ड्रॉप-आउट रेट कम होगा
- माता-पिता का भरोसा मजबूत होगा
STEM कोर्स में बढ़ सकता है लड़कियों का नामांकन
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे बड़ा असर STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) कोर्स पर पड़ेगा। अक्सर देखा गया है कि इंजीनियरिंग, साइंस और टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स के लिए लड़कियों को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है, लेकिन आवास की समस्या के कारण कई परिवार एडमिशन से पीछे हट जाते हैं। हॉस्टल सुविधा मिलने से इन कोर्स में लड़कियों का नामांकन बढ़ सकता है, जिससे टेक्निकल सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी।
2035 तक 50% नामांकन का लक्ष्य
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत सरकार ने हायर एजुकेशन में छात्राओं का नामांकन 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल यह आंकड़ा करीब 29 प्रतिशत है।सरकार का मानना है कि हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल (Girls Hostel Budget 2026) बनने से-
- हायर एजुकेशन तक पहुंच आसान होगी
- सामाजिक और आर्थिक बाधाएं कम होंगी
- 2035 तक तय लक्ष्य हासिल करना संभव होगा
कामकाजी महिलाओं को भी मिलेगा सीधा फायदा
इस योजना का असर सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। नौकरी के लिए दूसरे जिलों में आने वाली महिलाओं को भी इन हॉस्टल में रहने का विकल्प मिलेगा। इससे-
- महिलाओं को सुरक्षित आवास मिलेगा
- नौकरी चुनने में स्वतंत्रता बढ़ेगी
- वर्कफोर्स में महिला भागीदारी मजबूत होगी
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि इस साल के बजट में समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई है और हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण इसी दिशा में एक ठोस कदम है।
सिर्फ इमारत नहीं, अवसरों का निर्माण
बजट 2026 की यह घोषणा केवल हॉस्टल (Girls Hostel Budget 2026) बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर खोलने की दिशा में एक संरचनात्मक सुधार है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह योजना आने वाले वर्षों में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर बदल सकती है।
Also read: क्या उर्फी जावेद ने बदला धर्म और बनीं गीता भारद्वाज? उर्फी जावेद ने धर्म विवाद पर तोड़ी चुप्पी



