Emergency Landing Facility Assam: असम के डिब्रूगढ़ जिले में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मोरन बाईपास पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया। यह पूर्वोत्तर भारत की पहली ऐसी सुविधा है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकसित की गई है। इस अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य (Lakshman Prasad Acharya) और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने चाबुआ हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सुविधा 4.4 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-127 (NH-127) के हिस्से पर तैयार की गई है। इसे भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर नागरिक उड्डयन (Emergency Landing Facility Assam) के लिए भी उपयोग में लाया जा सकेगा।
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हाईवे पर उतरा सैन्य इतिहास
प्रधानमंत्री मोदी चाबुआ एयरफील्ड से C-130J विमान में सवार होकर सीधे मोरन एयरस्ट्रिप पर उतरे। इसी एयरस्ट्रिप पर राफेल और सुखोई-30 लड़ाकू विमानों ने लैंडिंग और टेकऑफ कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत एक राफेल और एक सुखोई-30 की लैंडिंग से हुई। इसके बाद वायुसेना के डॉर्नियर विमान ने टेकऑफ किया। C-130J की सफल लैंडिंग ने इस स्ट्रिप की सामरिक उपयोगिता को और मजबूत किया। मंच के सामने तीन सुखोई विमानों ने फ्लाई-पास्ट करते हुए ‘टच एंड गो’ ड्रिल की, जिसके बाद तीन राफेल विमानों ने फार्मेशन में प्रदर्शन किया। यह आयोजन केवल उद्घाटन तक (Emergency Landing Facility Assam) सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय वायुसेना की तैयारियों और समन्वित युद्ध क्षमता का प्रदर्शन भी बना।
टू-फ्रंट चुनौती के बीच बढ़ती तैयारी
भविष्य में संभावित दो-फ्रंट युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय वायुसेना देशभर में वैकल्पिक रनवे तैयार कर रही है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप (Emergency Landing Facility Assam) का निर्माण इसी रणनीति का हिस्सा है। सरकार की योजना के अनुसार अलग-अलग राज्यों में कुल 19 और इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप तैयार की जाएंगी। इनमें राजस्थान और पश्चिम बंगाल में 3-3, तमिलनाडु में 1, आंध्र प्रदेश में 2, गुजरात में 2, हरियाणा में 1, पंजाब में 1, जम्मू-कश्मीर में 1 और असम में 5 स्ट्रिप शामिल हैं। यह पहल केंद्र सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय वायुसेना के संयुक्त प्रयास से आगे बढ़ रही है।
पूर्वोत्तर को मिला रणनीतिक संदेश
डिब्रूगढ़ में बनी यह सुविधा केवल एक एयरस्ट्रिप नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के लिए रणनीतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है। चीन और म्यांमार की सीमाओं के नजदीक स्थित असम में इस तरह की बुनियादी ढांचा परियोजना सीमा सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि युद्ध या आपातकाल की स्थिति में यह स्ट्रिप एयर ऑपरेशन (Emergency Landing Facility Assam) के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही, नागरिक उड्डयन के लिए भी यह एक अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प प्रदान करेगी।
5,500 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ
प्रधानमंत्री ने इस दौरे के दौरान 5,500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं (Emergency Landing Facility Assam) की भी शुरुआत की। इनमें सड़क, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। इससे न केवल सैन्य तैयारियों को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और निवेश को भी गति मिलेगी।
विकास और सुरक्षा का नया संतुलन
मोरन की यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (Emergency Landing Facility Assam) बताती है कि अब विकास परियोजनाएं केवल नागरिक जरूरतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा का आयाम भी जोड़ा जा रहा है। हाईवे पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेकऑफ की यह क्षमता भारत को रणनीतिक रूप से अधिक लचीला बनाती है। संकट की स्थिति में जहां पारंपरिक एयरबेस निशाना बन सकते हैं, वहीं ऐसे वैकल्पिक रनवे देश की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती देंगे। पूर्वोत्तर में यह कदम न सिर्फ बुनियादी ढांचे के विस्तार का संकेत है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अब यह क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के केंद्र में है।
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