Earthquake in Myanmar-Thailand : 28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप के झटकों से हड़कंप मच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के दो भूकंप आए, जिनका केंद्र म्यांमार के सागाइंग शहर से महज 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी, और इसके झटके थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक महसूस किए गए, जिससे लोग घबराकर सड़कों पर निकल आए।
Earthquake in Myanmar-Thailand : क्या रहा भूकंप का कारण ?
म्यांमार में आए इस भूकंप का कारण टेक्टोनिक प्लेटों का गतिशील होना है। धरती की सतह पर टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के संपर्क में होती हैं और ये धीमी गति से हिलती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या खिसकती हैं, तो इससे निकलने वाली ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में महसूस होती है, जो भूकंप का कारण बनती हैं। सागाइंग क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है, क्योंकि यह भारत और म्यांमार की टेक्टोनिक प्लेटों की बाउंड्री पर स्थित है। यहां एक 1200 किलोमीटर लंबी फॉल्ट लाइन है, जो समय-समय पर भूकंपों का कारण बनती रही है। इस क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट्स के मूवमेंट के कारण भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है, और इस बार आए भूकंप की तीव्रता ज्यादा थी। इमारतों का ढहना और पुलों का गिरना जैसे दृश्य वीडियो में सामने आए हैं, जो इस भूकंप की भयावहता को दर्शाते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी के नीचे टेक्टोनिक प्लेटों का हर साल थोड़ा-थोड़ा मूवमेंट होता है, जो हर साल 11 से 18 एमएम तक हो सकता है। यह छोटे-मोटे बदलाव बड़े भूकंपों की ओर इशारा करते हैं, क्योंकि समय के साथ प्लेटों में तनाव बढ़ता जाता है। जब यह तनाव अचानक रिलीज होता है, तो बड़ा भूकंप आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार में आए भूकंप से जुड़े बढ़ते तनाव के कारण भविष्य में और भी बड़े भूकंप का खतरा हो सकता है। हालांकि, भूकंप के कारण कितना नुकसान हुआ है, इसकी पूरी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर शेयर हो रही तस्वीरों और वीडियो से साफ दिख रहा है कि यह भूकंप काफी भयावह था।



