NEET Paper Leak Row: देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर मचे विवाद और पेपर लीक मामले (NEET Paper Leak Row) के बाद केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने एजेंसी की कार्यप्रणाली को मजबूत करने और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से चार वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि यह कदम NTA की साख बचाने और भविष्य में होने वाली परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
NTA में दो संयुक्त सचिव और दो संयुक्त निदेशक नियुक्त
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने NTA में दो संयुक्त सचिव और दो संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति को स्वीकृति दे दी है। जारी आदेश के मुताबिक भारतीय सांख्यिकी सेवा (Indian Statistical Service) की 1998 बैच की अधिकारी अनुजा बापट और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की 2004 बैच की अधिकारी रुचिता विज को संयुक्त सचिव बनाया गया है।
वहीं भारतीय राजस्व सेवा (इनकम टैक्स) के अधिकारी आकाश जैन और भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा (IA&AS) के अधिकारी आदित्य राजेंद्र भोजगड़िया को संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया है। इन अधिकारियों को पांच वर्षों के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने इन नियुक्तियों के लिए खाली पड़े डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के पदों को अस्थायी रूप से अपग्रेड भी किया है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि केंद्र NTA के प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से मजबूत करना चाहता है।
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पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ा दबाव
इस साल 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था। लेकिन परीक्षा के तुरंत बाद पेपर लीक (NEET Paper Leak Row) के आरोप सामने आने लगे। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने और कई राज्यों से गड़बड़ियों की शिकायतों ने मामले को गंभीर बना दिया। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। इस फैसले से लाखों छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई, क्योंकि अब दोबारा परीक्षा की संभावना और भविष्य की तैयारी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
CBI जांच में तेजी, मुख्य आरोपी हिरासत में
पेपर लीक मामले (NEET Paper Leak Row) की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ में है। एजेंसी ने केस दर्ज कर विशेष टीमों का गठन किया है। जांच के दौरान कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ की कार्रवाई भी जारी है। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले के कथित मास्टरमाइंड पी वी कुलकर्णी और आरोपी मनीषा वाघमारे को 10 दिनों की CBI हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है और इसमें संगठित गिरोह की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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शिक्षा मंत्री ने मानी सुधार की जरूरत
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी माना है कि NTA को और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एजेंसी को ‘जीरो-एरर’ सिस्टम की तरफ ले जाना सरकार की प्राथमिकता है। उनके मुताबिक लगातार सुधार की प्रक्रिया जारी रहेगी और परीक्षा प्रणाली में तकनीकी तथा प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बदलाव किए जाएंगे। केवल अधिकारियों की नियुक्ति से समस्या (NEET Paper Leak Row) पूरी तरह खत्म नहीं होगी। परीक्षा प्रक्रिया में डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड पेपर ट्रांसमिशन, सेंटर मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने जैसे बड़े सुधार भी जरूरी हैं।
छात्रों और अभिभावकों में भरोसा लौटाने की चुनौती
NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक (NEET Paper Leak Row) जैसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं बल्कि छात्रों के मनोबल पर भी असर डालती हैं। अब सरकार और NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा वापस जीतने की है। नए अधिकारियों की नियुक्ति को इसी दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां कितनी तेजी से दोषियों तक पहुंचती हैं और NTA अपनी कार्यप्रणाली में कितने प्रभावी बदलाव कर पाती है।
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