DGCA fine on IndiGo: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) को पिछले महीने हुए व्यापक फ्लाइट संकट की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन पर 22.20 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना (DGCA fine on IndiGo) लगाया है और साथ ही 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई न केवल नियम उल्लंघन को लेकर है, बल्कि इसे यात्रियों की सुरक्षा और क्रू वेलफेयर से जुड़े गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
डीजीसीए ने यह सख्त कदम 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच हुए बड़े पैमाने पर उड़ान रद्द और देरी की घटनाओं की विस्तृत जांच के बाद उठाया। इस संकट से देशभर में तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए थे, जिससे विमानन व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
CEO पीटर एल्बर्स को कड़ी चेतावनी
नागर विमानन नियामक ने इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीटर एल्बर्स को भी सीधी चेतावनी जारी की है। डीजीसीए का कहना है कि एयरलाइन के शीर्ष प्रबंधन ने उड़ान परिचालन और संकट प्रबंधन की प्रभावी निगरानी नहीं की, जिससे हालात बेकाबू हो गए। नियामक ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल तकनीकी चूक का नहीं, बल्कि नेतृत्व स्तर पर जवाबदेही की कमी का है। डीजीसीए ने भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराए जाने पर और कड़े कदम उठाने के संकेत भी दिए हैं।

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कितनी उड़ानें रद्द और कितनी लेट हुईं?
डीजीसीए की चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार-
- 2,507 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं
- 1,852 उड़ानें भारी देरी से संचालित हुईं
- देश के लगभग सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स पर परिचालन प्रभावित रहा
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के निर्देश पर की गई इस जांच में सामने आया कि एयरलाइन की परिचालन योजना दबाव के हालात में पूरी तरह विफल रही।
CAR उल्लंघन – जुर्माने का असली कारण
डीजीसीए ने इंडिगो पर सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) के तहत छह गंभीर उल्लंघनों को लेकर एकमुश्त 1.80 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा, लगातार नियमों की अनदेखी के लिए 20.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त दंड (DGCA fine on IndiGo) लगाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि इंडिगो ने 5 दिसंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक कुल 68 दिनों तक अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया, जिसे नियामक ने ‘निरंतर गैर-अनुपालन’ की श्रेणी में रखा।
इंडिगो की प्रमुख चूक क्या रहीं?
डीजीसीए के अनुसार, इंडिगो ने गंभीर लापरवाहियां कीं-
- फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया
- रोस्टर में पर्याप्त बफर नहीं रखा गया
- क्रू की थकान प्रबंधन के बजाय व्यावसायिक दबाव को प्राथमिकता दी गई
- ऑपरेशनल कंट्रोल का अनुचित हस्तांतरण किया गया
- जवाबदेह प्रबंधन और नामित अधिकारियों की भूमिका कमजोर रही
नियामक का कहना है कि ये सभी खामियां सीधे तौर पर एयर सेफ्टी और क्रू वेलफेयर के लिए गंभीर खतरा हैं।
DGCA का सख्त संदेश – सेफ्टी से समझौता नहीं
डीजीसीए ने इंडिगो के उल्लंघनों को ‘जानबूझकर और प्रणालीगत लापरवाही’ करार दिया है। नियामक ने स्पष्ट किया कि भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर में यात्रियों की सुरक्षा और क्रू के स्वास्थ्य से किसी भी कीमत (DGCA fine on IndiGo) पर समझौता नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई पूरे विमानन उद्योग के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है कि परिचालन विस्तार के साथ-साथ नियामकीय अनुशासन भी उतना ही जरूरी है।
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