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Lokhitkranti > अंतर्राष्ट्रीय > US Military Reshuffle: क्या अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में? हर 30 दिन पर अफसर हटाने का ट्रंप का अभियान
अंतर्राष्ट्रीय

US Military Reshuffle: क्या अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में? हर 30 दिन पर अफसर हटाने का ट्रंप का अभियान

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-04-03 9:37 pm
Lokhit Kranti Published 2026-04-03
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US Military Reshuffle
US Military Reshuffle: क्या अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में? हर 30 दिन पर अफसर हटाने का ट्रंप का अभियान
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Trump vs Deep State: डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी रक्षा और खुफिया तंत्र के भीतर एक अभूतपूर्व ‘शुद्धिकरण’ अभियान चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन औसतन हर 30 दिन में सेना या खुफिया एजेंसी के एक शीर्ष अधिकारी को पद से हटा रहा है। व्हाइट हाउस का तर्क है कि वे एक ऐसी टीम बनाना चाहते हैं जो राष्ट्रपति की नीतियों के प्रति पूरी तरह वफादार हो, लेकिन इस सामूहिक विदाई ने वाशिंगटन के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आलोचक इसे सेना का राजनीतिकरण मान रहे हैं, जबकि ट्रंप समर्थक इसे ‘डीप स्टेट’ की सफाई बता रहे हैं।

Contents
इन दिग्गज अधिकारियों की हुई ‘छुट्टी’क्या है विवाद की असली जड़?भरोसेमंद टीम बनाम राष्ट्रीय सुरक्षासेना और सुरक्षा तंत्र का पुनर्गठनक्या होगा असर?

इस बड़े फेरबदल की सबसे बड़ी गाज उन अधिकारियों पर गिर रही है जो पिछली सरकार की नीतियों या सैन्य विचारधारा से जुड़े रहे हैं। अटलांटिक न्यूज और अन्य प्रमुख मीडिया घरानों के मुताबिक, एफबीआई (FBI) से लेकर नेशनल इंटेलिजेंस और कोस्ट गार्ड तक, कोई भी विभाग ट्रंप की इस छंटनी की रडार से बाहर नहीं है। इस कार्रवाई ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर नेतृत्व परिवर्तन से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है? (Trump vs Deep State)

इन दिग्गज अधिकारियों की हुई ‘छुट्टी’

अगस्त 2025 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक 12 से अधिक अति-विशिष्ट सैन्य और खुफिया अधिकारियों को हटाया जा चुका है या उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया है। इस सूची में प्रमुख नाम शामिल हैं:

  • जनरल चार्ल्स CQ ब्राउन जूनियर: जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन।
  • जनरल रैंडी जॉर्ज: आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ (रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा हटाए गए)।
  • एडमिरल लिसा फ्रांचेटी: नेवी ऑपरेशंस प्रमुख।
  • लेफ्टिनेंट जनरल जेफ्री क्रूज: डायरेक्टर, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी।

काश पटेल और डैनियल ड्रिस्कॉल: जैसे अधिकारियों के नाम भी संभावित विदाई की सूची में चर्चा का विषय बने हुए हैं। (Trump vs Deep State)

क्या है विवाद की असली जड़?

इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में DEI (Diversity, Equity, and Inclusion) नीतियां हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ खुले तौर पर ‘वोक’ (Woke) विचारधारा और सेना में विविधता बढ़ाने वाली नीतियों के धुर विरोधी रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि DEI पहल ने सेना की युद्धक क्षमता (Combat Readiness) को कमजोर किया है और मेरिट के बजाय सामाजिक एजेंडे को प्राथमिकता दी है। प्रशासन अब ऐसे कमांडरों को नियुक्त कर रहा है जो सामाजिक सुधारों के बजाय केवल सैन्य शक्ति और राष्ट्रपति के प्रति वफादारी पर ध्यान केंद्रित करें। (Trump vs Deep State)

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भरोसेमंद टीम बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा

व्हाइट हाउस का स्पष्ट रुख है कि राष्ट्रपति को अपनी टीम चुनने का संवैधानिक अधिकार है। वे उन लोगों को हटा रहे हैं जिन पर उन्हें “भरोसे की कमी” महसूस होती है। हालांकि, विपक्ष इस पर कड़ा ऐतराज जता रहा है। सीनेटर मार्क वार्नर जैसे नेताओं का कहना है कि अनुभवी अधिकारियों को बार-बार हटाने से खुफिया तंत्र कमजोर होता है और दुश्मनों को फायदा मिल सकता है। (Trump vs Deep State)

Trump vs Deep State
Trump vs Deep State:

सेना और सुरक्षा तंत्र का पुनर्गठन

ट्रंप सरकार में यह महज कुछ तबादले नहीं हैं, बल्कि यह पूरे सुरक्षा तंत्र को अपनी सोच के हिसाब से बदलने की एक सोची-समझी रणनीति है। एयर फोर्स के वाइस चीफ जनरल जेम्स स्लाइफ से लेकर नाटो (NATO) से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों तक को हटाया जाना यह दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और घरेलू सैन्य ढांचे को पूरी तरह से रीसेट करना चाहता है। (Trump vs Deep State)

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क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो अमेरिकी सेना के भीतर एक नया नेतृत्व तैयार होगा जो पूरी तरह से ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” और “एंटी-वोक” नीति पर आधारित होगा। लेकिन, इसके साथ ही यह डर भी बना हुआ है कि अनुभव की कमी और बार-बार होने वाले बदलावों से वैश्विक संकट के समय अमेरिका की त्वरित निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। (Trump vs Deep State)

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