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Lokhitkranti > अंतर्राष्ट्रीय > US-Iran War: ईरान से जंग छेड़ बुरी तरह फंसे ट्रंप! खत्म हो रहा हथियारों का जखीरा, क्या ईरान के सामने ‘महाशक्ति’ ने टेक दिए घुटने?
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US-Iran War: ईरान से जंग छेड़ बुरी तरह फंसे ट्रंप! खत्म हो रहा हथियारों का जखीरा, क्या ईरान के सामने ‘महाशक्ति’ ने टेक दिए घुटने?

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-04-27 6:18 अपराह्न
By Lokhit Kranti 3 महीना ago
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rump ceasefire missiles Crisi
ईरान से जंग छेड़ बुरी तरह फंसे ट्रंप! खत्म हो रहा हथियारों का जखीरा, क्या ईरान के सामने 'महाशक्ति' ने टेक दिए घुटने?
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Trump ceasefire missiles Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा भीषण संघर्ष अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आ गया है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अमेरिका खुद को लाचार महसूस कर रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अप्रैल को निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से कुछ ही घंटे पहले एकतरफा रूप से सीजफायर (युद्धविराम) की अवधि बढ़ा दी है। इस महीने में यह दूसरी बार है जब ट्रंप ने पीछे हटने का संकेत दिया है। सीजफायर के पीछे वाशिंगटन चाहे जो भी दलीलें दे, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अब किसी भी कीमत पर इस जंग से बाहर निकलना चाहते हैं, क्योंकि अमेरिका के हथियारों का जखीरा खतरनाक स्तर तक खाली हो चुका है। (Trump ceasefire missiles Crisis)

Contents
खत्म हो रहा घातक हथियारों का भंडारपैट्रियट और THAAD की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौतीउत्पादन में गिरावट और सहयोगियों की बढ़ी टेंशनईरान की जवाबी धमकियां और वैश्विक व्यापार पर खतराट्रंप के सामने कठिन विकल्प और पेंटागन में मतभेद

दूसरी ओर, ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है और वह जीत की गंध सूंघ रहा है। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी टेंशन यह है कि उसके पास लंबी दूरी की मिसाइलों और एयर डिफेंस सिस्टम की भारी कमी हो गई है। सीएनएन की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जंग में अमेरिका के प्रमुख मिसाइल भंडार का लगभग आधा हिस्सा खत्म हो चुका है। स्थिति इतनी गंभीर है कि इन हथियारों की भरपाई करने में अब तीन से पांच साल का समय लग सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन बस एक ऐसा ‘एग्जिट रूट’ (निकास मार्ग) तलाश रहा है, जिससे वह अपनी इज्जत बचाते हुए इस युद्ध से बाहर निकल सके। (Trump ceasefire missiles Crisis)

खत्म हो रहा घातक हथियारों का भंडार

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ शुरुआती 39 दिनों में ही लगभग 13,000 ठिकानों पर हमला किया, लेकिन इसकी भारी कीमत उसे चुकानी पड़ रही है।

  • THAAD इंटरसेप्टर: अमेरिका ने अपना 50% भंडार इस्तेमाल कर लिया है।
  • पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम: इसका भी करीब 50% हिस्सा खत्म हो चुका है।
  • प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल: 45% भंडार खाली है।
  • लगभग 30% स्टॉक इस्तेमाल हो चुका है।
  • अमेरिकी नौसेना ने अब तक 1,000 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जबकि 2026 में इनका उत्पादन मांग के मुकाबले बेहद कम है। (Trump ceasefire missiles Crisis)

पैट्रियट और THAAD की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए अमेरिका को बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर दागने पड़ रहे हैं। ईरान की ओर से आने वाली एक मिसाइल को रोकने के लिए अमेरिका को 2 से 4 पैट्रियट (PAC-3) मिसाइलें दागनी पड़ती हैं। चूंकि ईरान अब हाइपरसोनिक और क्लस्टर बमों वाली एडवांस्ड मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है, इसलिए अमेरिकी भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं। खाड़ी में स्थित अधिकांश अमेरिकी ठिकानों पर अब इंटरसेप्टर खत्म होने की कगार पर हैं। (Trump ceasefire missiles Crisis)

Read : वॉशिंगटन होटल में फायरिंग से हड़कंप, PM मोदी ने जताई चिंता

उत्पादन में गिरावट और सहयोगियों की बढ़ी टेंशन

अमेरिका में हथियारों का उत्पादन उसकी खपत के मुकाबले बहुत धीमा है। सालाना केवल 100 पैट्रियट मिसाइलों का उत्पादन होता है, जबकि युद्ध में इनकी खपत हजारों में है। स्थिति को संभालने के लिए अमेरिका अब जापान और दक्षिण कोरिया से मिसाइलें ट्रांसफर करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के खिलाफ अमेरिका की रक्षात्मक स्थिति कमजोर हो सकती है। जापान को पहले ही बताया जा चुका है कि ईरान युद्ध के कारण उसकी टॉमहॉक मिसाइलों की डिलीवरी में देरी होगी। (Trump ceasefire missiles Crisis)

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ईरान की जवाबी धमकियां और वैश्विक व्यापार पर खतरा

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र और इजरायल को निशाना बनाएगा। उसने समुद्र के नीचे मौजूद उन केबलों को काटने की धमकी दी है जो वैश्विक डेटा कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं। इसके अलावा, हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंडेब बंदरगाह को बंद करने की चेतावनी दी है, जहां से दुनिया का 12% व्यापार गुजरता है। (Trump ceasefire missiles Crisis)

ट्रंप के सामने कठिन विकल्प और पेंटागन में मतभेद

घरेलू स्तर पर समर्थन में कमी और घटते संसाधनों ने ट्रंप को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक नेतृत्व के बीच लक्ष्यों को लेकर मतभेद उभरने लगे हैं। ट्रंप की एकतरफा सीजफायर घोषणाएं इस बात का प्रमाण हैं कि वे अब और नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं हैं। (Trump ceasefire missiles Crisis)

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