Tarique Rahman Speech: बांग्लादेश की सियासत एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी है। हालिया भाषणों में तारिक रहमान का एक नारा तेजी से चर्चा में है कि, ‘न दिल्ली, न पिंडी, न कोई और देश…’। यह सिर्फ एक राजनीतिक लाइन नहीं, बल्कि बांग्लादेश की विदेश नीति और भविष्य की दिशा का संकेत माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह नारा पड़ोसी देशों से दूरी का संकेत है या ‘संतुलित कूटनीति’ की नई शुरुआत?
Tarique Rahman Speech: भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर नई बहस
तारिक रहमान ने कई इंटरव्यू और भाषणों में कहा है कि शेख हसीना के कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए कुछ समझौते ‘असंतुलित’ हैं और उनकी समीक्षा होनी चाहिए। उनका तर्क है कि किसी भी देश के साथ संबंध बराबरी और पारदर्शिता पर आधारित होने चाहिए।
यह बयान सीधे तौर पर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर असर डाल सकता है। पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है। ऐसे में ‘समीक्षा’ की मांग राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ रही है।
Tarique Rahman Speech: ‘न दिल्ली, न पिंडी’ का असली मतलब क्या?
तारिक रहमान के नारे में ‘दिल्ली’ और ‘पिंडी’ प्रतीक हैं, दिल्ली भारत की सत्ता का केंद्र और पिंडी यानी रावलपिंडी, जो पाकिस्तान की सैन्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह संदेश साफ है कि बांग्लादेश की नीति किसी एक देश के प्रभाव में नहीं होगी।
यह लाइन घरेलू राजनीति में राष्ट्रवाद को मजबूत करने की रणनीति भी हो सकती है। बांग्लादेश की जनता लंबे समय से चाहती है कि उनका देश स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाए। ऐसे में यह नारा भावनात्मक अपील करता है।
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Tarique Rahman Speech: अवामी लीग बनाम बीएनपी – वैचारिक टकराव
बांग्लादेश की राजनीति मुख्य रूप से दो ध्रुवों में बंटी रही है, एक तरफ अवामी लीग, दूसरी ओर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी। तारिक रहमान बीएनपी के शीर्ष नेता हैं और उनकी पार्टी लंबे समय से अवामी लीग की नीतियों की आलोचना करती रही है।
अवामी लीग के शासन में भारत के साथ सहयोग बढ़ा, वहीं बीएनपी अक्सर अधिक संतुलित या बहुध्रुवीय विदेश नीति की बात करती है। यही वैचारिक अंतर अब फिर उभर कर सामने आ रहा है।
Tarique Rahman Speech: समझौतों की समीक्षा – किन मुद्दों पर सवाल?
तारिक रहमान ने जिन समझौतों को ‘असंतुलित’ बताया, उनमें जल बंटवारा, सीमा प्रबंधन, ट्रांजिट और व्यापार से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने विस्तार से सूची सार्वजनिक नहीं की, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि भविष्य में इन समझौतों पर पुनर्विचार की मांग तेज हो सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी समझौते की समीक्षा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यह कदम दोनों देशों के रिश्तों में अस्थिरता भी ला सकता है।
Tarique Rahman Speech: क्षेत्रीय राजनीति और चीन फैक्टर
दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। यदि बांग्लादेश भारत से दूरी बनाता है, तो संतुलन बनाने के लिए वह चीन या अन्य वैश्विक शक्तियों की ओर झुक सकता है। हालांकि तारिक रहमान ने सीधे तौर पर किसी तीसरे देश का नाम नहीं लिया, लेकिन ‘न कोई और देश’ वाली पंक्ति यह संकेत देती है कि वे बहुध्रुवीय, लेकिन स्वायत्त नीति चाहते हैं।
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Tarique Rahman Speech: युवाओं और मध्यम वर्ग पर असर
बांग्लादेश की बड़ी आबादी युवा है। वे रोजगार, निवेश और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। भारत के साथ व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने कई अवसर पैदा किए हैं। ऐसे में यदि रिश्तों में तनाव आता है, तो इसका असर रोजगार और निवेश पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, राष्ट्रवादी भावनाएं भी युवाओं को आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि यह नारा सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है।
Tarique Rahman Speech: क्या बदलेगा बांग्लादेश का भविष्य?
अभी यह साफ नहीं है कि तारिक रहमान का यह नारा सिर्फ चुनावी बयान है या आने वाली विदेश नीति की झलक है। लेकिन इतना तय है कि बांग्लादेश की राजनीति में भारत के साथ संबंध एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है।
अगर बीएनपी सत्ता में आती है, तो संभव है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में ‘रीबैलेंसिंग’ देखने को मिले। हालांकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते इतने गहरे हैं कि पूर्ण दूरी की संभावना कम मानी जाती है।
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