Pakistan Economic Crisis: एक तरफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर अपनी कूटनीतिक धाक जमाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर से आई एक आर्थिक रिपोर्ट ने शहबाज शरीफ सरकार के होश उड़ा दिए हैं। पिछले महज दो हफ्तों के भीतर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लगभग 200 अरब रुपये का जबरदस्त नुकसान हुआ है। ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा संकट को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए सरकारी कदमों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल-गैस की आसमान छूती कीमतों ने पाकिस्तान के व्यापारिक पहियों को जाम कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में तनाव के कारण ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान के आयात बिल पर पड़ा है। ऊर्जा बचाने के लिए सरकार द्वारा दुकानों और बाजारों को जल्दी बंद करने के फैसले ने देश के रिटेल सेक्टर की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि एक तरफ जनता महंगे बिजली बिलों और गैस की किल्लत से त्रस्त है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान को अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। (Pakistan Economic Crisis)
दो हफ्तों में 200 अरब का नुकसान
पाकिस्तान के रिटेल सेक्टर के लिए पिछले 14 दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं। चेनस्टोर एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (CAP) के आंकड़ों के अनुसार, ऊर्जा बचत की आड़ में दुकानों को जल्दी बंद करने की नीति ने कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। एसोसिएशन का दावा है कि इस फैसले से केवल दो हफ्तों में देश को 200 अरब रुपये के व्यापार का घाटा हुआ है। विशेष रूप से संगठित रिटेल स्टोर्स (Organized Retail) को सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ रही है, जबकि छोटी और अनौपचारिक मार्केट पर नियमों का कड़ाई से पालन न होने के कारण व्यापार का संतुलन बिगड़ गया है। (Pakistan Economic Crisis)
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बिजली बिलों में फिर लगेगी आग
महंगे ईंधन का बोझ अब सीधे आम आदमी की जेब पर डालने की तैयारी पूरी हो चुकी है। पाकिस्तान का बिजली नियामक (Electric Power Regulatory Authority) फरवरी महीने के ‘फ्यूल एडजस्टमेंट’ (Fuel Adjustment Charge) के नाम पर प्रति यूनिट 1.42 रुपये की बढ़ोतरी वसूलने की योजना बना रहा है। ईंधन की कीमतें स्थिर न होने के कारण आने वाले महीनों में बिजली कटौती (Load Shedding) और गैस की कमी की समस्या और भी गंभीर हो सकती है, जिससे गर्मियों के मौसम में स्थिति विस्फोटक होने की आशंका है। (Pakistan Economic Crisis)
अमेरिका-ईरान सुलह की कोशिश और पाकिस्तान की मजबूरी
पाकिस्तान इस समय एक दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। वह खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए ‘US-Iran Talks 2.0’ में मध्यस्थता का प्रयास कर रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव का सीधा मतलब है पाकिस्तान के लिए महंगा तेल। ऊर्जा के लिए बाहरी देशों पर पूरी तरह निर्भर पाकिस्तान जानता है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी रहती है, तो उसकी बची-कुची अर्थव्यवस्था भी ढह जाएगी। हालांकि, अभी तक इन कूटनीतिक कोशिशों का कोई सकारात्मक परिणाम जमीन पर नहीं दिखा है। (Pakistan Economic Crisis)
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ऊर्जा संकट और ‘होर्मुज’ का डर
होर्मुज स्ट्रैट में किसी भी प्रकार की रुकावट का मतलब है पूरी दुनिया, विशेषकर एशिया के लिए ईंधन का संकट। पाकिस्तान के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट गर्मियों तक खिंच गया, तो देश में बिजली की मांग और आपूर्ति का अंतर इतना बढ़ जाएगा कि सरकार के पास भारी कटौती के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। फिलहाल, सरकार अपनी कूटनीतिक कोशिशों को तेज कर रही है ताकि ऊर्जा सप्लाई की अनिश्चितता को कम किया जा सके। (Pakistan Economic Crisis)
शहबाज शरीफ के सामने बड़ी चुनौती
शहबाज शरीफ सरकार के लिए यह समय ‘इधर कुआं उधर खाई’ जैसा है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय दबाव और महंगी ऊर्जा है, तो दूसरी तरफ घरेलू व्यापारियों का गुस्सा। 200 अरब का नुकसान यह बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय वेंटिलेटर पर है और कोई भी गलत फैसला देश को और गहरे आर्थिक गर्त में धकेल सकता है। (Pakistan Economic Crisis)
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