Hormuz Strait Crisis: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि, अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने जोर देकर कहा है कि जब तक अमेरिका और उसकी सहयोगी शक्तियां अपनी आक्रामक नीतियों को नहीं त्यागतीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और आसपास के क्षेत्रों में स्थिरता बहाल होना मुश्किल है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप करने की अपील की ताकि क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को समाप्त किया जा सके और वैश्विक व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाया जा सके। (Hormuz Strait Crisis)
इलाही ने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा कि वाशिंगटन की नीतियों पर भरोसा करना कठिन है। उन्होंने आरोप लगाया कि युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, ईरान के रणनीतिक समुद्री मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उनके अनुसार, यह न केवल ईरान के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी संभावित सैन्य या आर्थिक कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। (Hormuz Strait Crisis)
‘न युद्ध न शांति’ की स्थिति
हकीम इलाही ने वर्तमान स्थिति को “न युद्ध न शांति’ वाली अवस्था करार दिया है। उन्होंने बताया कि ईरान ने बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांगों को ठुकरा दिया और 40 दिनों तक कड़ा मुकाबला किया, जिसके कारण विरोधी पक्षों को युद्धविराम का प्रस्ताव देने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि, यह शांति केवल कागजों पर सिमट कर रह गई है। इलाही के अनुसार, ‘वर्तमान स्थिति पूर्ण शांति की नहीं है, बल्कि ‘न युद्ध न शांति’ वाली स्थिति है, जिसमें तनाव अभी भी बना हुआ है. आक्रामक नीतियां समाप्त होने पर ही स्थिरता बहाल होगी.’ (Hormuz Strait Crisis)
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अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप
ईरानी प्रतिनिधि ने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर एक ‘त्वरित हमले’ की योजना बनाई थी, जिसका मकसद ईरान की सरकार को कुछ ही दिनों में गिराना था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संघर्ष के दौरान जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया गया। हकीम इलाही ने कहा कि यदि अमेरिका और इजराइल अपने सैन्य अभियान पूरी तरह रोक दें, तो क्षेत्र में स्थिति बहुत तेजी से सामान्य हो सकती है। (Hormuz Strait Crisis)
होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक व्यापार पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। इलाही ने चिंता जताई कि यहाँ खड़ी की जा रही बाधाएं वैश्विक व्यापार को बाधित कर रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया को उन देशों से जवाब मांगना चाहिए जिन्होंने इस संघर्ष की शुरुआत की, न कि ईरान से उसकी प्रतिक्रिया पर सवाल करने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘ईरान के समुद्री मार्गों पर विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं, जिससे वैश्विक व्यापार बाधित हो रहा है. इस क्षेत्र में स्थिरता तभी बहाल हो सकती है जब आक्रामक नीतियों को समाप्त किया जाए.’ (Hormuz Strait Crisis)
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बातचीत की प्रक्रिया और अचानक हुए हमले
ईरान का दावा है कि वह हमेशा से बातचीत के पक्ष में रहा है। इलाही ने बताया कि ओमान और जिनेवा में कूटनीतिक चर्चा सकारात्मक दिशा में बढ़ रही थी, लेकिन अचानक हुए हमलों ने शांति की इस प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया। उन्होंने वैश्विक शक्तियों से आर्थिक और व्यापारिक अलगाव की नीतियों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि ऐसी नीतियां किसी सरकार को नहीं बल्कि निर्दोष नागरिकों को चोट पहुंचाती हैं। (Hormuz Strait Crisis)
ईरान की सैन्य तैयारी और भविष्य की चेतावनी
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उकसावे की कार्रवाई जारी रही, तो संघर्ष एक बार फिर भड़क सकता है। इलाही ने अमेरिका को नसीहत देते हुए कहा कि भरोसे की कमी ही सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन वह किसी भी हमले का मुकाबला करने के लिए अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं रखेगा। (Hormuz Strait Crisis)
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