Israel Lebanon Yellow Line: लेबनान में हालात एक बार फिर तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। Israel Lebanon Yellow Line अब सिर्फ एक सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि बड़ा भू-राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। सीजफायर लागू होने के बावजूद, इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में ‘येलो लाइन’ बनाकर नए हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है। ईरान और हिज्बुल्लाह ने इसे खुली चुनौती बताया है, जबकि इजराइल इसे आत्मरक्षा का कदम बता रहा है।
सीजफायर के बीच क्यों भड़का संघर्ष?
16 अप्रैल को लागू हुए संघर्ष-विराम के बाद उम्मीद थी कि हालात सामान्य होंगे, लेकिन Israel Lebanon Yellow Line के निर्माण ने इस उम्मीद को कमजोर कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान के कई गांवों में लगातार गोलाबारी की गई। इस दौरान मशीनगन से फायरिंग की गई और दो बड़े हवाई हमले भी किए गए। इनमें से एक हमला हिज्बुल्लाह लड़ाकों के एक समूह को निशाना बनाकर किया गया। इजराइल का दावा है कि ये सभी कार्रवाई ‘खतरे को रोकने’ के लिए की गईं।
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‘येलो लाइन’ पर क्यों हो रहे हमले?
Israel Lebanon Yellow Line के तहत इजराइल ने एक काल्पनिक सैन्य सीमा तय की है। इजराइल द्वारा किए गए पहले हमले में उन लड़ाकों को निशाना बनाया गया जो ‘येलो लाइन’ के करीब पहुंच रहे थे, हालांकि वे इस लाइन को पार नहीं कर पाए थे। इसके बाद दूसरे हमले में एक व्यक्ति को टारगेट किया गया, जो कथित तौर पर एक सुरंग के प्रवेश द्वार की ओर बढ़ रहा था। इजराइल ने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई के दौरान उस सुरंग को नष्ट कर दिया गया।
क्या है ‘येलो लाइन’?
‘येलो लाइन’ असल में जमीन पर खींची गई एक काल्पनिक सीमा होती है, जो दो विरोधी क्षेत्रों को अलग करती है। Israel Lebanon Yellow Line का मुख्य मकसद इजराइली सेना और संभावित खतरे वाले इलाकों के बीच एक सुरक्षित दूरी बनाना है, ताकि सीधे टकराव की स्थिति को कम किया जा सके।
इसके साथ ही यह रणनीति संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रोकने में मदद करती है। इस लाइन के जरिए इजराइल अपने सैन्य नियंत्रण को भी मजबूत करना चाहता है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त हो सके। बीबीगौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में गाजा में भी इजराइल ने इसी तरह का मॉडल अपनाया था।
क्या यह गाजा जैसा फॉर्मूला है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि Israel Lebanon Yellow Line पूरी तरह ‘गाजा मॉडल’ से प्रेरित है। गाजा में क्षेत्र को दो हिस्सों में बांट दिया गया है, जहां उत्तर और दक्षिण इलाकों पर अलग-अलग नियंत्रण स्थापित किया गया है। इस विभाजन ने न केवल प्रशासनिक स्थिति को जटिल बना दिया है, बल्कि जमीनी हालात और मानवीय चुनौतियों को भी और अधिक गंभीर बना दिया है। अब लेबनान में भी उसी रणनीति को लागू करने की कोशिश दिख रही है।
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हिज्बुल्लाह और ईरान की प्रतिक्रिया
हिज्बुल्लाह के नेता नईम कासिम ने इस कदम को लेबनान की संप्रभुता का खुला अपमान बताया है। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के लगातार हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर यह जारी रहे, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ईरान ने भी Israel Lebanon Yellow Line को क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम बताया है।
क्या सीजफायर का उल्लंघन हुआ?
इजराइल का कहना है कि उसने सीजफायर का कोई उल्लंघन नहीं किया है और उसके द्वारा किए गए सभी हमले ‘आत्मरक्षा’ के तहत आते हैं। वहीं, समझौते के अनुसार इजराइल को खतरे की स्थिति में कार्रवाई करने की अनुमति दी गई है, साथ ही उसे 55 गांवों पर नियंत्रण बनाए रखने की छूट भी मिली हुई है। यही कारण है कि Israel Lebanon Yellow Line को कानूनी बहस का मुद्दा भी बनाया जा रहा है।
जमीनी हालात क्या कहते हैं?
ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। लोग अब भी सड़कों पर मौजूद हैं, जबकि कई परिवार अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। वहीं, डर और असुरक्षा के माहौल के चलते कुछ लोग फिर से राहत शिविरों का रुख कर रहे हैं। सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में भय और अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।
क्या हो सकता है आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Israel Lebanon Yellow Line पर टकराव बढ़ता है, तो संघर्ष एक बार फिर भड़क सकता है। ऐसी स्थिति में कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ने की आशंका है और शांति बहाली की कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है। इसके साथ ही, इस तनाव का असर सिर्फ इजराइल और लेबनान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
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