Iran US Israel Conflict Protests: मिडिल ईस्ट एक बार फिर ग्लोबल टेंशन का एपिसेंटर बन चुका है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल को खुली धमकी दे दी है, और इसी के साथ देश के अंदर सरकार के खिलाफ भयंकर प्रोटेस्ट चल रहे हैं। यह सिर्फ एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट नहीं है, बाल्की पूरे इलाके के लिए वॉर्निंग बेल है। इस पूरे संकट को समझने के लिए हमें ईरान के अंदर और बाहर दोनों तरफ से आग देखनी होगी।
Iran US Israel Conflict Protests: ईरान पार्लियामेंट से खुली चेतावनी
ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने जो कहा, उसने वॉशिंगटन और तेल अवीव दोनों को अलर्ट मोड में डाल दिया। पार्लियामेंट के अंदर ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगते रहे और कलीबाफ ने साफ-साफ कहा, ‘अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इजराइल और इलाके में सारे अमेरिकी मिलिट्री बेस, जहाज और हित हमारे निशाने पर होंगे।’
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक लिमिटेड नहीं रहेगा, अगर खतरे का सिग्नल मिला तो प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक भी कर सकता है।
यह बयान साफ़ दिखाता है कि ईरान-US-इज़राइल संघर्ष अब सिर्फ़ डिप्लोमैटिक लेवल पर नहीं हो रहा है।
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Iran US Israel Conflict Protests: सड़कों पर आग – ईरान में सरकार-विरोधी प्रोटेस्ट तेज
पिछले दो हफ्तों से ईरान के शहरों में जो हो रहा है, वो 1979 के बाद का सबसे बड़ा अंदरूनी अशांति माना जा रहा है। तेहरान से मशहद तक लोग सड़कों पर हैं।
प्रोटेस्ट के वो नंबर जिन्होंने दुनिया को चौंका दिया
• 116 लोगों की मौत
• 2600+ अरेस्ट
• इंटरनेट और इंटरनेशनल कॉलिंग पूरी तरह से बंद
ईरान सरकार ने इसलिए इन्फॉर्मेशन ब्लैकआउट किया ताकि बाहर की दुनिया तक असली तस्वीरें न पहुंचें। लेकिन जो रिपोर्ट आ रही हैं, वो सिचुएशन को और भी सीरियस बताती हैं।
Iran US Israel Conflict Protests: इकॉनमी कोलैप्स – प्रोटेस्ट की असली वजह क्या है?
क्या गरीबों के विद्रोह की शुरुआत इकॉनमिक कोलैप्स से हुई है।
रियाल का हिस्टोरिक क्रैश
• 1 US डॉलर = 14 लाख+ ईरानी रियाल
• महंगाई, बेरोजगारी, बेसिक जरूरतों की कमी
शुरुआत में प्रोटेस्ट महंगाई और बेरोजगारी को लेकर थे, लेकिन धीरे-धीरे ये इस्लामिक कलेरिकल सिस्टम के खिलाफ डायरेक्ट चैलेंज बन गए। लोग सिर्फ ‘रोटी’ नहीं, अब ‘आजादी’ भी मांग रहे हैं।
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Iran US Israel Conflict Protests: रिलीजियस रूल अंडर डायरेक्ट चैलेंज
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान में धार्मिक लीडरशिप की आयरन ग्रिप रही है। लेकिन इस बार नारे और प्रोटेस्ट सीधे सुप्रीम लीडर और सिस्टम के खिलाफ जा रहे हैं।
इसी कॉन्टेक्स्ट में देश निकाला क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी लोगों से अपील की है कि वो सड़कों पर उतरें और शासन को चैलेंज करें। ये पॉइंट ईरान सरकार के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है।
Iran US Israel Conflict Protests: ट्रंप फैक्टर – प्रोटेस्टर्स को ओपन सपोर्ट
इस संकट में डोनाल्ड ट्रंप का रोल भी आग में घी डालने जैसा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरानी प्रोटेस्टर्स का ओपन सपोर्ट किया और कहा, ‘ईरान पहले से कहीं ज्यादा आजादी के करीब है। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।’
मिलिट्री एक्शन की बात
• न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक
• ट्रंप को ईरान पर मिलिट्री ऑप्शन दिए गए हैं
• अभी फाइनल डिसीजन नहीं, लेकिन वॉर्निंग क्लियर है
अमेरिकी विदेश विभाग ने भी कहा है कि ट्रंप की धमकियों को हल्के में न लिया जाए।
Iran US Israel Conflict Protests: बासिज और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स – शासन का कवच
ईरानी संसद के लाइव टेलीकास्ट में कालिबाफ ने पुलिस, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और बासिज फोर्स की तारीफ की। बाजिस फोर्स को ईरान शासन का बैकबोन माना जाता है, जो विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए जाना जाता है।
Iran US Israel Conflict Protests: भगवान का दुश्मन – प्रोटेस्टर्स के लिए मौत की चेतावनी
ईरान के अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि जो भी –
• प्रोटेस्ट में शामिल होगा
• प्रोटेस्टर्स की मदद करेगा
उसे ‘भगवान का दुश्मन’ माना जाएगा, जिसके लिए मौत की सजा भी हो सकती है। यह बयान साफ दिखाता है कि सरकार का नरम रवैया लेने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
Iran US Israel Conflict Protests: ग्लोबल इम्पैक्ट – क्या मिडिल ईस्ट में वॉर आने वाली है?
अगर ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच सीधी लड़ाई होती है, तो इसका इम्पैक्ट होगा –
• तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं
• मिडिल ईस्ट में अस्थिरता
• ग्लोबल मार्केट क्रैश
• साउथ एशिया तक सिक्योरिटी इम्पैक्ट
इस दुनिया की सारी बड़ी ताकतें इस सिचुएशन पर बहुत करीब से नजर रख रही हैं।
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