Iran Strait of Hormuz Blockade: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां दुनिया की ‘आर्थिक लाइफलाइन’ कहे जाने वाले ‘स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज’ पर युद्ध के काले बादल गहरा गए हैं। ईरान ने अपनी चालें इस तरह चली हैं जैसे एक छोटी सी चींटी विशाल हाथी के कान में घुसकर उसे धराशायी करने की क्षमता रखती हो। ईरान बार-बार चेतावनी दे रहा है कि हॉर्मुज उसका है और उसकी अनुमति के बिना यहां से परिंदा भी पर नहीं मार सकता। हाल ही में यूएई (UAE) के तट के पास एक ब्रिटिश कंटेनर जहाज पर हुए अज्ञात हमले ने इस दावे को और अधिक डरावना बना दिया है।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अब हॉर्मुज की उस नब्ज को पकड़ लिया है, जिसके दबने से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था कराह सकती है। अमेरिका और इजरायल की धमकियों के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। ब्रिटिश जहाज का आग के गोले में तब्दील होना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन की ‘डेथ, फायर एंड फ्युरी’ वाली चेतावनी को ईरान का सीधा जवाब माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका की नेवी इस रास्ते को खुला रख पाएगी या फारस की खाड़ी में लगने वाली यह आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी?
चेतावनी या युद्ध का बिगुल?
यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, यूएई के पास एक मालवाहक जहाज को अज्ञात हथियार से निशाना बनाया गया। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला ईरान की उस ‘शतरंज वाली चाल’ का हिस्सा है, जिससे वह संदेश देना चाहता है कि अगर ईरान पर सीधा हमला हुआ, तो दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री नस को काट दिया जाएगा। (Iran Strait of Hormuz Blockade)

दुनिया की 25% तेल सप्लाई पर ईरान का ‘कब्जा’
स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल की खपत का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों का तेल इसी रास्ते से एशिया और यूरोप पहुंचता है। ईरान इस रास्ते के उत्तरी तट पर बैठा है, जो इसे भौगोलिक रूप से महाशक्ति बनाता है। (Iran Strait of Hormuz Blockade)
ईरान की ‘इंश्योरेंस पॉलिसी’ और इकोनॉमिक टेरर
ईरान सीधे युद्ध के बजाय ‘प्रॉक्सी’ और ‘इकोनॉमिक टेरर’ की रणनीति अपना रहा है। सामरिक विशेषज्ञों के अनुसार, ‘ईरान हॉर्मुज का इस्तेमाल एक ‘इंश्योरेंस पॉलिसी’ की तरह कर रहा है। उसे पता है कि जब तक वह इस रास्ते को कंट्रोल करेगा, दुनिया उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर पाएगी।’ अगर हॉर्मुज बंद होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें रातों-रात 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकती हैं, जिससे अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो जाएगी। (Iran Strait of Hormuz Blockade)
इजरायल की घेराबंदी और सप्लाई चेन पर प्रहार
इजरायल के लिए समुद्री व्यापार उसकी रीढ़ है। ईरान समर्थित हूतियों ने पहले ही लाल सागर को अशांत कर रखा है, और अब हॉर्मुज पर दबाव बनाकर ईरान इजरायल की पूरी सप्लाई चेन को काट देना चाहता है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) आर. पी. सिंह का कहना है। ‘अमेरिका के लिए हॉर्मुज को खुला रखना उसकी साख का सवाल है। अगर ईरान इसे ब्लॉक करने की कोशिश करता है तो हम तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर होंगे क्योंकि अमेरिका अपनी पूरी नौसैनिक शक्ति यहां झोंक देगा।’ (Iran Strait of Hormuz Blockade)
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क्या काम आएगी ट्रंप की धमकी?
डोनाल्ड ट्रंप की ‘डेथ, फायर एंड फ्युरी’ वाली छवि के बावजूद ईरान बातचीत की मेज पर अपना हाथ ऊपर रखना चाहता है। ईरान इस तनाव का उपयोग अमेरिका के साथ भविष्य की किसी भी डील में ‘अपर हैंड’ हासिल करने के लिए कर रहा है। अब गेंद अमेरिका और इजरायल के पाले में है क्या वे कूटनीति से इस ‘नब्ज’ को ढीला करवा पाएंगे या फिर फारस की खाड़ी का यह उबाल ग्लोबल ट्रेड को तबाह कर देगा? (Iran Strait of Hormuz Blockade)



