Macron India Visit: फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron की तीन दिवसीय भारत यात्रा ने दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। यात्रा के पहले दिन प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। दूसरे दिन भी उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी रहा, जहां कई संभावित व्यापारिक समझौतों और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
India France Relations के बीच दशकों से भरोसे पर आधारित मजबूत संबंध रहे हैं। स्वतंत्रता के तुरंत बाद 1947 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। तब से लेकर अब तक यह साझेदारी लगातार विस्तृत और गहरी होती गई है।
रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव
1998 में स्थापित India France Relations दोनों देशों के रिश्तों का अहम पड़ाव थी। यह भारत की किसी पश्चिमी देश के साथ पहली औपचारिक रणनीतिक साझेदारी थी। इसके बाद रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में तालमेल लगातार बढ़ा है।
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1960 के दशक में फ्रांस ने भारत के श्रीहरिकोटा लॉन्च सेंटर के विकास में सहयोग दिया था। इसके बाद तरल इंजन तकनीक और उपग्रह प्रक्षेपण से जुड़े क्षेत्रों में भी साझेदारी मजबूत हुई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES के बीच 50 वर्षों से अधिक का सहयोग दोनों देशों के वैज्ञानिक रिश्तों की मजबूती को दर्शाता है।
रक्षा सहयोग- भरोसे का प्रतीक
रक्षा क्षेत्र भारत-फ्रांस संबंधों की सबसे अहम कड़ी रहा है। 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान फ्रांस ने भारत के साथ संतुलित और सहयोगी रुख अपनाया। हाल के वर्षों में राफेल लड़ाकू विमान सौदे ने इस साझेदारी को नई ऊंचाई दी।
2015 में भारत और फ्रांस के बीच राफेल विमानों की खरीद का समझौता हुआ और 2022 तक 36 राफेल विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जा चुके हैं। हाल ही में भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी दिए जाने की खबरों ने इस सहयोग को और मजबूत करने का संकेत दिया है।
इसके अलावा पी-75 स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजना भी रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि रही है। इस परियोजना के तहत तैयार अंतिम पनडुब्बी को भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका है, जिससे समुद्री सुरक्षा क्षमता में वृद्धि हुई है।
परमाणु और आर्थिक संबंधों में विस्तार
2008 में हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते ने दोनों देशों के संबंधों को एक नया आयाम दिया। इस समझौते के जरिए भारत को वैश्विक परमाणु व्यापार में पुनः स्थापित करने में मदद मिली। फ्रांस उन देशों में शामिल रहा जिसने भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की प्रतिबद्धता दिखाई।
आर्थिक दृष्टि से फ्रांस यूरोपीय संघ में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024-25 में भारत ने फ्रांस को 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का निर्यात किया। भारत से फ्रांस को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में खनिज ईंधन, मशीनरी, विद्युत उपकरण और विमानन से जुड़े सामान शामिल रहे। वहीं भारत ने फ्रांस से विमान, परमाणु उपकरण, औद्योगिक मशीनरी और चिकित्सा उपकरण आयात किए। जनवरी 2026 में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में और तेजी आने की उम्मीद है।
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निवेश और शिक्षा में सहयोग
फ्रांस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक अहम स्रोत बन चुका है। देश में एक हजार से अधिक फ्रांसीसी कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। सेवा क्षेत्र, सीमेंट, विमानन और पेट्रोलियम जैसे क्षेत्रों में फ्रांसीसी निवेश उल्लेखनीय रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी India France Relations मजबूत हो रहे हैं। वर्तमान में लगभग 10 हजार भारतीय छात्र फ्रांस में अध्ययन कर रहे हैं, और 2030 तक इस संख्या को 30 हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। व्यवसाय प्रबंधन, इंजीनियरिंग और तकनीकी पाठ्यक्रमों में भारतीय छात्रों की विशेष रुचि देखी जा रही है।
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भविष्य की संभावनाएं
Macron India Visit स्पष्ट संकेत देती है कि India France Relations को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रक्षा उत्पादन, हरित ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं खुल रही हैं।
तीन दिवसीय Macron India Visit से दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है। वैश्विक मंच पर बदलते राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों के बीच भारत और फ्रांस की साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।
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