Haryana Milk Scheme: हरियाणा सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी कदम उठाया है। राज्य में बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण स्तर को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना (Haryana Milk Scheme) के तहत 170 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। यह पहल सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि कुपोषण के खिलाफ एक संगठित अभियान के रूप में देखी जा रही है।
किसे मिलेगा फायदा – 12 लाख से ज्यादा लाभार्थी
इस योजना (Haryana Milk Scheme) के तहत प्रदेश में करीब 9.46 लाख बच्चों और 2.56 लाख गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लाभ मिलेगा। यानी कुल मिलाकर 12 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन सभी लाभार्थियों को साल में 300 दिनों तक पौष्टिक और फोर्टिफाइड स्किम्ड दूध उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनके स्वास्थ्य में दीर्घकालिक सुधार हो सके।
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कुपोषण खत्म करने का लक्ष्य – 2026-27 पर नजर
राज्य सरकार ने 2026-27 तक कुपोषण, खासकर गंभीर कुपोषण को लगभग समाप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए पोषण अभियान को और मजबूत किया जा रहा है। अब तक प्रदेशभर में करीब 9.92 लाख लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिससे जरूरतमंदों की पहचान कर उन्हें समय पर सहायता दी जा सके।
डेटा आधारित निगरानी और बेहतर समन्वय पर जोर
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने विभागों के बीच बेहतर तालमेल और डेटा आधारित निगरानी की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि योजनाओं का असली लाभ तभी मिलेगा जब सेवाएं अंतिम छोर तक प्रभावी तरीके से पहुंचें। इस दिशा में स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और पंचायत विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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गांव-गांव तक जागरूकता – पंचायतों की बढ़ेगी भूमिका
सरकार अब इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए पंचायतों को सक्रिय भूमिका में ला रही है। ग्राम सभाओं में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। महिला पंच और सरपंचों को ‘परिवर्तन के वाहक’ के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही पोषण वाटिकाओं के विकास और आंगनबाड़ी केंद्रों पर मासिक योग दिवस आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एनीमिया और बाल स्वास्थ्य पर फोकस
योजना (Haryana Milk Scheme) के तहत सिर्फ दूध वितरण ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य सुधार पर ध्यान दिया जा रहा है। आयरन और फोलिक एसिड की खुराक को मजबूत किया जाएगा। ORS और जिंक के जरिए दस्त प्रबंधन। और टीकाकरण, डिवार्मिंग और विटामिन-A कवरेज का विस्तार। इन उपायों से बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य को समग्र रूप से बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय पोषण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा
सरकार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए भी समुदाय आधारित पहल शुरू कर रही है। आयरन युक्त आहार, पारंपरिक पोषणयुक्त भोजन, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूकता, कम वजन वाले नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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आंगनबाड़ी केंद्रों को बनाया जा रहा मजबूत
सेवा वितरण को बेहतर बनाने के लिए राज्य में करीब 15,900 आंगनबाड़ी केंद्रों का विद्युतीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा सभी जिलों में फोर्टिफाइड तेल, डबल फोर्टिफाइड नमक की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिससे पोषण स्तर में और सुधार हो सके।
पोषण से विकास तक – बदलता हरियाणा मॉडल
हरियाणा सरकार का यह कदम सिर्फ स्वास्थ्य सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ‘ह्यूमन डेवलपमेंट मॉडल’ के रूप में भी देखा जा रहा है। पोषण, स्वास्थ्य, जागरूकता और बुनियादी सुविधाओं को जोड़कर एक समग्र विकास की दिशा में काम किया जा रहा है। ‘मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना’ हरियाणा में कुपोषण के खिलाफ एक मजबूत हथियार बनकर उभर रही है। अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में राज्य मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले में एक मिसाल बन सकता है।
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