Ghaziabad News:जैसा की हम सभी जानते है की जल ही जीवन है। और बिना पानी के धरती के ऊपर किसी भी प्रकार के पशु,पक्षी और इंसान का जीना संभव नहीं है। जबकि धरती पर 71 %पानी है। लेकिन वहीँ हम देखे तो उसमें से पीने योग्य पानी केवल 3 % ही है। इस पीने योग्य पानी का सबसे अहम स्तोत्र भूजल है। जिससे धरती पर रह रहा इंसान अपना जीवन यापन करता है।
ये है पूरा मामला :

Ghaziabad news: बता दे की वसुंधरा सेक्टर 4 सी० की वार्तालोक सोसाइटी में नगर निगम द्वारा सप्लाई किया जा रहा पानी पीने के काबिल नहीं है, पानी की हालत इतनी ख़राब है की इसमें से दुर्गंध भी आ रही है। इसका मुख्य कारण है तेज़ी से गिरता हुआ भूजल व फक्ट्रियों में बिना एनओसी और पंजीकरण के धरती की कोख को ख़ाली करने वाले अवैध बोरवेल हैं जिसके कारण धरती से निकलने वाले पानी का स्तर लगातार गिर रहा है और इससे दूषित पानी का दायरा लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है।आपको बता दें की नगर निगम द्वारा आवासीय सोसायटियों से समय-समय पर लिए जाने वाले पानी के सैंपल चिताजनक हैं। इसी कड़ी में आज वार्तालोक सोसाइटी के पानी में टीडीएस (टोटल डिजोल्वड सॉलिड्स) मतलब पूर्णतया घुले हुए ठोस पदार्थ की मात्रा 966 पायीं गई है। जबकि मानकों के अनुसार यह मात्रा 300 से नीचे होनी चाहिए। क्योंकि पानी के अंदर टीडीएस की मात्रा 300 से अधिक होने पर यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। जानकारों के अनुसार दूषित व 300 से अधिक टीडीएस का पानी शरीर में कई तरीके की बीमारियों को न्योता दें सकता है। इससे बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वो पानी को उबालकर और ठंडा करके पीएं ताकि पानी की शुद्धता बनी रहे।और तमाम बीमारियों से बचा जा सके।
टैक्स भुगतान के बाद भी नहीं मिल रहा पीने योग्य पानी

Ghaziabad News: समिती के महासचिव प्रेमनाथ पांडे व अध्यक्ष आर०के० सिंह ने बताया कि नगर निगम द्वारा अत्यंत ख़राब गुणवत्ता के पानी की सप्लाई किए जाने की वजह से निवासियों को बोतल बंद पानी पर निर्भर रहकर अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है। जब कि सोसायटी निवासी हमेशा से नगर निगम को अपना हाउस टैक्स व वॉटर टैक्स भुगतान करते रहे हैं जिस कारण यह नगर निगम की औपचारिक ज़िम्मेदारी बन जाती है की वह हाऊसिंग सोसाइटियों में रह रहे लोगो के लिए पर्याप्त एवं पिने के योग्य पानी व्यवस्ता कराये।



