Ghaziabad News : नहीं हैं चिता जलाने की जगह
गाजियाबाद के विजयनगर से एक ऐसी खबर सामने आई हैं । जो आपके होश उड़ा देगी। जहां एक तरफ उत्तरप्रदेश के विकास की ओर अग्रसर होने की बात कही जा रही हैं। तो दूसरी ओर एक ऐसा भी शहर हैं । जहां लोगों के पास मृत के अंतिम संस्कार के लिए शमशान घाट ही नहीं हैं।
Ghaziabad News : क्या हैं मामला ?
यह मामला हैं विजयनगर का , जहां साढ़े पांच लाख की आबादी के बीच मृत के दाह संस्कार के लिए श्मशान घाट नहीं है। हालांकि, विजयनगर बाइपास पर श्मशान की एक भूमि भी है लेकिन वहां सुविधाएं न होने के कारण लोग 15 किलोमीटर का चक्कर लगाकर हरनंदी मोक्षस्थली पहुंचते हैं या फिर नोएडा की सीमा में लगने वाले छिजारसी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा करते है। इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम के सदन में पार्षदों ने भी उठाया। लेकिन, लोगों को श्मशान घाट नहीं मिल सका।
विजय नगर बाइपास पर हरनंदी नदी के किनारे पर श्मशान की भूमि बनी हुई है। चारों तरफ गंदगी और कूड़े के ढेर से घिरे घाट पर केवल लकड़ियां पड़ी हैं। बताया गया कि चिताओं के लिए चबूतरा, टिन शेड, पानी, लोगों के लिए बैठने और किसी कर्मचारी की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को लंबा चक्कर लगाकर हरनंदी मोक्षस्थली या हरनंदी नदी के दूसरी तरफ नोएडा के छिजारसी में जाना पड़ता है। यहां तक कि अंतिम संस्कार के बाद लोगों को पर्ची बनवाने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ती है।
Ghaziabad News : 2018 में पास हुए थे प्रस्ताव
वार्ड नंबर 27 डूंडाहेड़ा के पार्षद नरेश जाटव ने बताया कि साल 2018 में निगम के सदन में विजयनगर क्षेत्र के लिए दो श्मशान घाट बनाए जाने का प्रस्ताव पास हुए था । इसके तहत डूंडाहेड़ा में तीन बीघा जमीन पर श्मशान घाट बनाना था और मिठ्ठेपुर में भी एक श्मशान बनाने का प्रस्ताव शामिल था लेकिन अब तक दोनों में से कोई भी श्मशान घाट तैयार नहीं हुए हैं।



