Ghaziabad News: प्रथम अपीलीय अधिकारियों के कार्य में मुख्यालय स्तर से हो रहे अनावश्यक हस्तक्षेप के खिलाफ एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (WPIL-1740/2025) इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल की गई है। यह याचिका गाजियाबाद निवासी अनिमेष मित्तल द्वारा अधिवक्ता विशेष राजवंशी के माध्यम से दाखिल की गई है।
Ghaziabad News: याचिका में लगे आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यालय स्तर से अपीलीय अधिकारियों को भेजे गए पत्रों और निर्देशों के माध्यम से उनके स्वतंत्र निर्णय लेने की प्रक्रिया पर दबाव बनाया जा रहा है। इससे न केवल अधिकारियों में भय का वातावरण बन रहा है, बल्कि वादकारियों को समय पर और निष्पक्ष न्याय मिलने में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।
इस याचिका का मूल उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि अपीलीय अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने दिया गया, तो इससे समूची न्यायिक प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
हाल के महीनों में यह देखा गया है कि विभिन्न प्रशासनिक निकायों द्वारा अपीलीय अधिकारियों को कार्य करने के संबंध में निर्देशित किया जा रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान माना जा रहा है। याचिका में संलग्न पत्रों का हवाला देते हुए यह दावा किया गया है कि यह हस्तक्षेप न केवल अनुचित है, बल्कि संविधान प्रदत्त न्यायिक स्वतंत्रता के भी विरुद्ध है।
इस विषय में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मित्तल ने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा को बनाए रखना है। उम्मीद है कि माननीय उच्च न्यायालय इस मामले में उचित संज्ञान लेकर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखेगा।
यह जनहित याचिका एक ऐसे समय में आई है जब न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर पूरे देश में बहस चल रही है। ऐसे में यह याचिका न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता, बल्कि आम जनता के न्याय प्राप्ति के अधिकार की रक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल बन सकती है। अब देखना यह होगा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या यह याचिका आने वाले समय में न्याय प्रणाली में आवश्यक सुधारों की राह प्रशस्त कर सकेगी।
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