Ghaziabad News : उत्तर प्रदेश में शिक्षा के मौलिक अधिकार को लागू करने वाले निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गाजियाबाद जिले में आरटीई के तहत निर्धारित लगभग 19,666 सीटों में से केवल 6,306 बच्चों का चयन हो सका, इनमें से भी सिर्फ 3,272 बच्चों का दाखिला अब तक सुनिश्चित हो पाया है।
Ghaziabad News : जिले में 1,200 से अधिक RTE स्कूल
गाजियाबाद के 5 जोनों में आने वाले लगभग 1,206 निजी स्कूलों में हर वर्ष RTE के अंतर्गत गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को दाखिला दिया जाना होता है। इस वर्ष चार चरणों में दिसंबर 2024 से मार्च 2025 तक लॉटरी प्रक्रिया के तहत 6,306 बच्चों का चयन किया गया था। लेकिन 19,666 सीटों में से 13,360 सीटें खाली रह गईं। यानी हजारों बच्चे अब भी शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित हैं। और अब तक दाखिला पाने वाले बच्चों की संख्या मात्र 3,272 ही है, जो कुल चयनित बच्चों का भी लगभग 50% है।
Ghaziabad News : शासन की मंशा पर भारी शिक्षा विभाग की सुस्ती
RTE दाखिला प्रक्रिया को इस बार समय से शुरू किया गया ताकि नए शिक्षा सत्र से पहले सभी बच्चों का स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके। लेकिन 6 महीने बीतने के बाद भी आधे से अधिक बच्चों के दाखिले अधूरे हैं। स्कूलों द्वारा आरटीई नियमों की अनदेखी, शिक्षा विभाग की ढीली कार्यवाही और जिला प्रशासन की चुप्पी इस योजना की विफलता की बड़ी वजह बन रही है। शिक्षा विभाग अब तक केवल निजी स्कूलों को नोटिस और चेतावनी भेजने तक ही सीमित रहा है। न तो ठोस निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई और न ही किसी स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। निजी स्कूल अक्सर शासन के आदेशों की अनदेखी करते हैं, जिससे गरीब बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाता है।
Ghaziabad News : बेसिक शिक्षा मंत्री को संभालनी होगी कमान
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया, तो हर वर्ष की तरह हजारों गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। अब वक्त आ गया है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षा मंत्री खुद इस मुद्दे की निगरानी करें और जिला प्रशासन को जवाबदेह बनाएं।
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