रिपोर्टर
राहुल कुमार
Uttarakhand Reconnect Connection 2025 : राजधानी दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘उत्तराखण्ड Reconnect – Connection 2025’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ, जिसने दिल्ली और उत्तराखण्ड के बीच सांस्कृतिक, भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव को एक नई ऊँचाई दी।
इस विशेष अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में दिल्ली में बसे उत्तराखण्ड मूल के सैकड़ों लोग शामिल हुए और अपनी संस्कृति, परंपराओं तथा आपसी भाईचारे का उत्सव मनाया।
Uttarakhand Reconnect Connection 2025 : पहाड़ी परिवारों को जड़ो से जोड़ा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली और उत्तराखण्ड की दूरी केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि दिलों की नज़दीकी से भी मापी जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम राजधानी में बसे पहाड़ी परिवारों को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने आयोजकों को इस सुंदर पहल के लिए शुभकामनाएं दीं और भरोसा दिलाया कि दिल्ली सरकार भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को हर संभव सहयोग देगी।

Uttarakhand Reconnect Connection 2025 : उत्तराखण्ड के व्यंजनों की लगी प्रदर्शनी
कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के लोक गीत, नृत्य, वाद्ययंत्रों की धुन और पारंपरिक परिधान में सजे कलाकारों ने माहौल को पूरी तरह पहाड़ी रंग में रंग दिया। उपस्थित दर्शकों ने झोड़ा, छपेली और लोकगीतों पर थिरकते हुए अपनी सांस्कृतिक धरोहर को याद किया। इसके अलावा, उत्तराखण्ड के व्यंजनों की प्रदर्शनी और हस्तशिल्प स्टॉल ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘उत्तराखण्ड Reconnect – Connection 2025’ में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ।
आप सभी देवभूमि के प्यारे भाइयों-बहनों को मेरा हार्दिक प्रणाम। आपकी ऊर्जा और आपके प्रेम को देखकर हर बार मन प्रसन्न हो जाता है।
दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की… pic.twitter.com/JuzgiPk67L
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) August 10, 2025
Uttarakhand Reconnect Connection 2025: उत्तराखण्डी समुदाय के जुड़ाव का प्रतीक
आयोजकों ने बताया कि ‘उत्तराखण्ड Reconnect’ का उद्देश्य राजधानी में बसे उन लोगों को एक मंच पर लाना है जो अपनी मातृभूमि से दूर रहकर भी उसकी संस्कृति, बोली और परंपराओं को संजोए रखना चाहते हैं। कार्यक्रम का समापन सामूहिक गीत और सभी अतिथियों के समूह चित्र के साथ हुआ।
यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बना, बल्कि दिल्ली में बसे उत्तराखण्डी समुदाय के बीच एक नई ऊर्जा और जुड़ाव की भावना भी पैदा कर गया।



