Uttar Pradesh News : दिल्ली के लोगों को कैसे फायदा होगा ?
उत्तर प्रदेश मेें नई शराब नीति लागू की गई हैं। जिसका लाभ दिल्ली के लोगों को भी मिलेगा। दिल्ली सरकार ने अगस्त 2022 में अपनी नई शराब नीति (2021-22) को वापस ले लिया था, जिसके बाद राजधानी में शराब की उपलब्धता और विकल्पों की भारी कमी देखी गई। इस कारण दिल्ली के उपभोक्ताओं को गुरुग्राम से शराब खरीदनी पड़ती थी, जहां न केवल कीमतें कम हैं बल्कि विकल्प भी अधिक उपलब्ध हैं। हालांकि, अब यूपी सरकार की नई आबकारी नीति दिल्लीवासियों के लिए गुरुग्राम का एक नया विकल्प प्रदान करेगी। खासतौर पर पूर्वी और उत्तरी दिल्ली के लोगों के लिए नोएडा और गाजियाबाद आना बेहतर साबित होगा , क्योंकि यहां से दिल्ली की दूरी नोेएडा और गाजियाबाद की तुलना में कम हैं।
Uttar Pradesh News : क्या हैं इस नीति में ?
लखनऊ में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यूपी के आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि नई नीति के तहत राज्य में शराब की तीन श्रेणियों की दुकानें होंगी । जिसमें मॉडल शॉप, देशी शराब की दुकानें और कंपोजिट दुकानें शामिल हैं । सिंह ने स्पष्ट किया कि अब विदेशी शराब, वाइन और बीयर केवल कंपोजिट दुकानों पर उपलब्ध होगी। बीयर की अलग से दुकानें नहीं होंगी, बल्कि इन्हें कंपोजिट दुकानों या फिर देशी शराब की दुकानों पर ही बेचा जाएगा। कंपोजिट दुकानों की अवधारणा पहले से ही राजस्थान, मध्य प्रदेश और दक्षिणी राज्यों में लागू है। सिंह ने बताया कि इन दुकानों की संख्या बीयर और विदेशी शराब की दुकानों के कुल आंकड़े से अधिक नहीं होगी, यानी नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे, बल्कि मौजूदा दुकानों को ही नए सिरे से पुनर्गठित किया जाएगा। हालांकि, कुछ जिलों में इनकी संख्या कम की जा सकती है।
Uttar Pradesh News : क्यों बनाई गई नई नीति ?
गौतमबुद्ध नगर के आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ शराब की बिक्री को सुव्यवस्थित करना है। नई नीति के तहत वाइन विक्रेताओं के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। प्रत्येक जिले में नाममात्र के लाइसेंस शुल्क पर वाइन की दुकानें खोली जा सकेंगी, जिससे किसानों को भी लाभ होगा, क्योंकि वे अपने फलों को वाइन उत्पादन के लिए बेच सकेंगे। इसके अलावा, गाजियाबाद, नोएडा, आगरा और लखनऊ में कम-अल्कोहल वाले बार के लाइसेंस शुल्क को घटाने की योजना भी बनाई गई है। इन बारों में केवल बीयर और वाइन परोसी जाएगी, जिससे ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे और राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।



