नई दिल्ली। संसद भवन में संसदीय लोकतंत्र अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE), लोकसभा सचिवालय द्वारा आयोजित 3 दिवसीय Personality Development प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम का पहला दिन विशेष रूप से यादगार रहा, जब चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रख्यात शिक्षाविद् प्रोफेसर जमाल अहमद सिद्दीकी ने “स्वदेशी ज्ञान प्रणाली एवं विकसित भारत 2047” विषय पर अपना अतिथि व्याख्यान प्रस्तुत किया।
Personality Development कार्यक्रम का शुभारंभ
3 दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त, आधुनिक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाना है। संसद भवन के सभागार में जैसे ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, देशभर से आए वरिष्ठ अधिकारियों, विद्वानों और संसदीय कार्य से जुड़े विशेषज्ञों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

PRIDE के निदेशक प्रो. प्रशांत मालिक ने सबसे पहले सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए इस कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल लोकसभा और राज्यसभा बल्कि देशभर की राज्य विधानसभाओं की कार्यशैली, शोध और सूचना सेवाओं को नए आयाम देगी।
प्रो. मालिक ने कहा –
“हमारा प्रयास है कि संसदीय लोकतंत्र की जड़ों को और गहराई तक ले जाया जाए। सूचना और शोध सेवाओं की गुणवत्ता जितनी बेहतर होगी, निर्णय लेने की प्रक्रिया उतनी ही सटीक और प्रभावी होगी। यह कार्यक्रम इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।”
प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी का व्याख्यान – स्वदेशी ज्ञान और आधुनिक दृष्टि का संगम
Personality Development कार्यक्रम के पहले दिन का मुख्य आकर्षण रहे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी। उन्होंने अपने संबोधन में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
प्रो. सिद्दीकी ने कहा कि “वर्तमान समय में सही समय पर सही सूचना और सटीक रेफरेंस उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही के दौरान सीमित समय में तथ्यों और संदर्भों को प्रस्तुत करना बेहद कठिन कार्य होता है। ऐसे में सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) की भूमिका अनिवार्य हो जाती है।
उन्होंने आगे कहा –
“आज के युग में सूचना का महासागर है, लेकिन उसमें से सही और प्रमाणिक तथ्य निकालना ही सबसे बड़ी कला है। संसद और विधानमंडल के पुस्तकालय यदि आधुनिक तकनीक और डिजिटल साधनों से लैस होंगे, तभी वे प्रतिनिधियों को समय रहते सटीक जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे। यह केवल सूचना देने का कार्य नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का दायित्व भी है।”
विकसित भारत 2047 और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली
अपने व्याख्यान में प्रो. सिद्दीकी ने “विकसित भारत 2047” के संकल्प का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत यह दृष्टि केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक, सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर भी आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना करता है।
“स्वदेशी ज्ञान प्रणाली” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपरा – चाहे वह वेद-उपनिषद हों, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन या समाज व्यवस्था – आधुनिक विज्ञान और तकनीक को दिशा देने में सक्षम है।
उन्होंने कहा –
“हमें यह समझना होगा कि विकसित भारत का निर्माण केवल विदेशी तकनीक और संसाधनों से नहीं होगा। हमें अपनी जड़ों से जुड़ना होगा, अपने पारंपरिक ज्ञान को पुनर्जीवित करना होगा और उसे आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करना होगा। यही सही मायनों में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा है।”
सूचना प्रौद्योगिकी और लोकतंत्र की गुणवत्ता
प्रो. सिद्दीकी ने आगे कहा कि संसद और विधानसभाओं के लिए सूचना सेवाएं केवल किताबें और दस्तावेज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह सकतीं। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स और क्लाउड टेक्नोलॉजी का प्रयोग अनिवार्य हो चुका है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी विषय पर सांसद को बहस करनी है तो उन्हें मिनटों में विश्वसनीय और अद्यतन जानकारी चाहिए। यदि पुस्तकालय सेवाएं डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी होंगी, तो यह कार्य सरल और तेज हो जाएगा।

Personality Development कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी
इस अवसर (Personality Development) पर लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्य विधानसभाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। कई अधिकारियों ने माना कि इस प्रकार की कार्यशालाएं संसदीय लोकतंत्र की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए आवश्यक हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा –
“हम अक्सर देखते हैं कि बहस के दौरान तथ्यों की कमी या गलत जानकारी के कारण बहस का स्तर गिर जाता है। यदि हमारे पास एक मजबूत सूचना-प्रणाली होगी, तो न केवल बहस का स्तर ऊँचा होगा बल्कि जनता का लोकतंत्र पर विश्वास भी और मजबूत होगा।”
Personality Development का महत्व
तीन दिवसीय इस कार्यशाला (Personality Development) में अधिकारियों और प्रतिनिधियों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से निम्न विषय शामिल होंगे:
- व्यक्तित्व विकास और संचार कौशल
- सूचना प्रबंधन और शोध कार्य
- संसदीय परंपरा और आचरण
- डिजिटल पुस्तकालय और आधुनिक तकनीक का उपयोग
- विकसित भारत 2047 की रूपरेखा और भूमिका
विश्लेषण – क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था है। यहाँ 543 लोकसभा सदस्य, 245 राज्यसभा सदस्य और करोड़ों मतदाता इस प्रणाली का हिस्सा हैं। इतनी विशाल लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है कि सूचना और शोध सेवाएं अद्यतन, सटीक और वैज्ञानिक हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सांसदों और विधायकों को समय रहते प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध हो तो बहस का स्तर बेहतर होगा और नीतिगत फैसले अधिक प्रभावी बनेंगे। यही कारण है कि PRIDE की इस पहल को लोकतंत्र की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



