Delhi Varanasi Bullet Train: देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर (Delhi Varanasi Bullet Train) को रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिल गई है। इस परियोजना के तहत 840 किलोमीटर से अधिक लंबी दूरी को महज 4 घंटे में तय किया जा सकेगा। वर्तमान में यही सफर 8 से 12 घंटे तक लेता है। सूत्रों के अनुसार, अगले दो से तीन महीनों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर जमीनी काम शुरू होने की संभावना है। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक शहर वाराणसी से हाई-स्पीड रेल के माध्यम से जोड़ेगा।
सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की राष्ट्रीय योजना
केंद्र सरकार ने देशभर में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (Delhi Varanasi Bullet Train) विकसित करने की रूपरेखा तैयार की है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में भारी कमी लाना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है। हालिया बजट में इन हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए लगभग 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान जताया गया है। इन ट्रैकों पर ट्रेनें 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर (Delhi Varanasi Bullet Train) को मिली प्राथमिकता
दिल्ली-बनारस हाई-स्पीड कॉरिडोर (Delhi Varanasi Bullet Train) को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। इस परियोजना को लागू करने की जिम्मेदारी National High Speed Rail Corporation Limited (NHSRCL) को सौंपी गई है। कंपनी ने क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने और प्रारंभिक प्रक्रियाओं को तेज करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक और राजनीतिक अहमियत को देखते हुए इस रूट को पहले चरण में शुरू किया जा रहा है। वाराणसी देश के प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र भी है, जिससे इस परियोजना का महत्व और बढ़ जाता है।
किन शहरों से होकर गुजरेगी बुलेट ट्रेन?
प्रस्तावित रूट के अनुसार बुलेट ट्रेन दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, लखनऊ और प्रयागराज होते हुए वाराणसी पहुंचेगी। इस कॉरिडोर पर कुल 13 से 14 स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेलवे बोर्ड को सौंपी जा चुकी है। निर्माण लागत और भू-आकृति का सटीक आकलन करने के लिए फिलहाल LiDAR तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण किया जा रहा है। यह रूट धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक और शैक्षणिक शहरों को भी तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
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निर्माण से पहले की प्रक्रियाओं में तेजी
रेलवे बोर्ड ने सभी सात प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण, डिजाइन स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि सात में से छह परियोजनाओं की रिपोर्ट तैयार है, जबकि वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर सर्वे कार्य जारी है। परियोजना की निगरानी के लिए साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य की गई है, ताकि काम में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।
किस देश की तकनीक होगी इस्तेमाल?
हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं (Delhi Varanasi Bullet Train) में एक समान तकनीकी मानक लागू करने की योजना है। इसके लिए रेलवे के तकनीकी स्टाफ और इंजीनियरों के प्रशिक्षण का आकलन किया जा रहा है। अभी यह अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है कि इस कॉरिडोर में जर्मनी, फ्रांस या रूस में से किस देश की हाई-स्पीड रेल तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम, विशेष ट्रैक डिजाइन और आधुनिक ट्रेन सेट इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं होंगी।
उत्तर भारत के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
दिल्ली से वाराणसी (Delhi Varanasi Bullet Train) तक यात्रा समय में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। इससे व्यापारिक यात्राएं आसान होंगी, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और उत्तर भारत के शहरों के बीच आर्थिक संपर्क मजबूत होगा। यदि यह परियोजना तय समयसीमा में पूरी होती है, तो यह भारत के बुनियादी ढांचे के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
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