Sensex Fall Reasons: भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते लगातार दबाव में नजर आ रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन लाल निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है। जो गिरावट पहले नॉर्मल प्रॉफिट बुकिंग लग रही थी, अब वो एक सीरियस करेक्शन का सिग्नल देने लगी है।
पिछले तीन दिनों में BSE Sensex 1,100 से ज्यादा पॉइंट टूट चुका है, वहीं निफ्टी 50 में भी करीब 1% की गिरावट आई है। इस पूरी गिरावट के पीछे क्या डोमेस्टिक और ग्लोबल फैक्टर्स का कॉम्बो काम कर रहा है।
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Sensex Fall Reasons: सेंसेक्स-निफ्टी परफॉर्मेंस – नंबर्स क्या कहते हैं?
अगर नंबर्स की बात करें तो 2 जनवरी को सेंसेक्स 85,762 के आस-पास बंद हुआ था, लेकिन बुधवार को इंट्राडे ट्रेडिंग में यह 84,617 के लो लेवल तक फिसल गया। आखिर में थोड़ी रिकवरी जरूर हुई, लेकिन फिर भी सेंसेक्स 102 पॉइंट्स गिरकर 84,961 पर बंद हुआ।
वहीं निफ्टी 50 38 पॉइंट्स गिरकर 26,140 पर बंद हुआ, जो साफ तौर पर बताता है कि मार्केट सेंटिमेंट कमजोर बना हुआ है।
1. हैवीवेट स्टॉक्स में बिकवाली – मार्केट पर सबसे बड़ा प्रेशर
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह लार्ज-कैप स्टॉक्स में सेलिंग प्रेशर रही। मार्केट के हेवीवेट स्टॉक्स जब गिरते हैं, तो पूरा इंडेक्स हिल जाता है।
• HDFC बैंक का शेयर बुधवार को 1.7% गिरा
• रिलायंस इंडस्ट्रीज 0.4% नीचे बंद हुआ
• ट्रेंट के शेयर 1.4% टूट गए
पिछले दिन भी HDFC बैंक और रिलायंस जैसे Stocks में हेवी सेलिंग देखी गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट किसी बिजनेस की कमजोरी की वजह से नहीं, बल्कि टेक्निकल फैक्टर्स और सेटलमेंट से जुड़ी एक्टिविटीज की वजह से हुई है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, कुछ गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों में ज्यादा वोलैटिलिटी के कारण मार्केट को दिशाहीन बना रही है।
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2. वेनेजुएला संकट – जियोपॉलिटिकल टेंशन का ग्लोबल असर
ग्लोबल लेवल पर वेनेजुएला पॉलिटिकल क्राइसिस ने मार्केट को और नर्वस कर दिया है। 3 जनवरी को हुई एक विवादित US मिलिट्री एक्शन के बाद, वेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी की खबरों ने दुनिया भर के इन्वेस्टर्स को शॉक कर दिया।
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े ऑयल रिजर्व हैं, और वहां अस्थिरता का मतलब है ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर रिस्क। इसका सीधा असर एनर्जी प्राइस और इमर्जिंग मार्केट पर पड़ता है और इंडिया भी इससे अलग नहीं है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में जियोपॉलिटिकल न्यूज से चलने वाले वोलैटिलिटी मार्केट को और हिला सकती है।
Sensex Fall Reasons: ट्रंप फैक्टर और ग्लोबल पॉलिसी अनिश्चितता
मार्केट सेंटिमेंट पर एक और बड़ा फैक्टर है डोनाल्ड ट्रंप के बयान और पॉलिसी फैसले। उनके टैरिफ से जुड़े कमेंट्स और ट्रेड पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसलों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
जब भी US पॉलिसी में अस्थिरता होती है, तो विदेशी निवेशक रिस्क-ऑफ मोड में चले जाते हैं, जिसका सीधा असर इंडियन इक्विटीज पर पड़ता है।
3. कमजोर ग्लोबल संकेतों और एशियाई बाजारों की गिरावट
भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को एशियाई बाजारों की गिरावट का भी दबाव महसूस किया।
• जापान के शेयर बाजारों में तेज गिरावट
• चीन ने जापान पर कुछ संवेदनशील निर्यात पर प्रतिबंध की घोषणा की
• ताइवान मुद्दे पर बढ़ते तनाव
इन सबका मिला-जुला असर एशिया के गरीब इलाकों पर पड़ा, और भारत भी इस ग्लोबल बिकवाली से बच नहीं पाया।
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4. टेक्निकल इंडिकेटर्स – करेक्शन या बड़ी गिरावट?
टेक्निकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट किसी बड़े बेयर मार्केट की शुरुआत नहीं है, बल्कि एक हेल्दी करेक्शन या कंसोलिडेशन फेज हो सकता है।
एमके ग्लोबल के एनालिस्ट जयकृष्ण गांधी के मुताबिक, 1991 के बाद निफ्टी ने जितने भी बड़े बुल रन देखे हैं, उनके बाद टाइम-बेस्ड करेक्शन आया है, न कि तेज क्रैश।
उनके हिसाब से:
• निफ्टी का मजबूत सपोर्ट जोन: 25,500 – 25,300
• मीडियम-टर्म अपसाइड टारगेट: 28,500
इसका मतलब यह है कि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए पैनिक का नहीं, बाल्की स्ट्रैटेजी बनाने का टाइम है।
Sensex Fall Reasons: फार्मा सेक्टर – मार्केट में ब्राइट स्पॉट
जहां बाकी सेक्टर्स प्रेशर में हैं, वहीं फार्मा सेक्टर तुलना में मजबूत दिख रहा है। निफ्टी फार्मा इंडेक्स में बुलिश सिग्नल बने हुए हैं और एक्सपर्ट्स को लगता है कि आने वाले टाइम में इस सेक्टर में और अपसाइड देखने को मिल सकता है।
डिफेंसिव नेचर होने की वजह से, वोलैटिलिटी के टाइम पर फार्मा स्टॉक्स इन्वेस्टर्स को थोड़ी स्टेबिलिटी देते हैं।
Sensex Fall Reasons: इन्वेस्टर्स के लिए स्ट्रैटेजी – घबराएं नहीं, समझदारी से काम लें
इस समय मार्केट में पैनिक सेलिंग करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। अगर आप लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर हैं, तो क्वालिटी स्टॉक्स में करेक्शन के दौरान धीरे-धीरे खरीदने की बेहतर स्ट्रैटेजी हो सकती है।
शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए वोलैटिलिटी ज्यादा रहेगी, इसलिए स्ट्रिक्ट स्टॉप-लॉस और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है।
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