Global market pressure: भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का कारोबारी दिन भारी दबाव और बेचैनी लेकर आया। सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा, जब सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। Global market pressure और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार का पूरा मूड बिगाड़ दिया। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की करोड़ों रुपये की पूंजी डूब गई और दलाल स्ट्रीट पर बेचैनी का माहौल बन गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात सिर्फ घरेलू कारणों से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव की वजह से बने हैं। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की खबरों ने दुनिया भर के निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट
मंगलवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स कमजोर शुरुआत के साथ नीचे फिसल गया। कुछ ही मिनटों में बीएसई सेंसेक्स 200 अंकों से ज्यादा टूटकर 77,094 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 24,050 के अहम स्तर के नीचे लुढ़क गया।
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Global market pressure का असर लगभग सभी सेक्टरों में दिखाई दिया। आईटी, बैंकिंग, ऑटो और मेटल शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार में निवेशकों का भरोसा कमजोर नजर आया और ट्रेडिंग के दौरान उतार-चढ़ाव लगातार बना रहा।
बीते कुछ सत्रों में बाजार ने स्थिरता दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात ने उस संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया।
अमेरिका-ईरान तनाव बना सबसे बड़ा कारण
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नए प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात बिगड़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं।
Global market pressure के चलते विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है। इससे बाजार में कमजोरी और बढ़ गई है।
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कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड लगातार सातवें दिन तेजी के साथ कारोबार कर रहा है। मंगलवार को इसकी कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। ऊंचे कच्चे तेल के दाम सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बनता है।
Global market pressure के बीच तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता और गहरा दी है। बाजार को डर है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में नजर आया। खासकर सरकारी बैंकों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 1.6 फीसदी तक टूट गया। प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी दिखाई दी। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में मुनाफावसूली शुरू कर दी।
Global market pressure का असर इस सेक्टर पर इसलिए भी ज्यादा दिखा क्योंकि बैंकिंग शेयर विदेशी निवेशकों की पसंद माने जाते हैं। एफआईआई की बिकवाली ने बाजार में दबाव और बढ़ा दिया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने बड़े स्तर पर बिकवाली की है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी के जरिए बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन विदेशी बिकवाली का असर ज्यादा भारी पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक Global market pressure कम नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
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निवेशकों की नजर तिमाही नतीजों पर
आज बाजार की दिशा तय करने में कॉर्पोरेट नतीजों की भी बड़ी भूमिका रहने वाली है। निवेशकों की नजर खास तौर पर मारुति सुजुकी और बजाज फिनसर्व जैसी बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी हुई है।
अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल ग्लोबल संकेत घरेलू सकारात्मक खबरों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। Global market pressure के बीच निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपना रहे हैं और बड़े निवेश से बचते दिखाई दे रहे हैं।
छोटे निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। मौजूदा गिरावट को लंबी अवधि के नजरिए से भी देखा जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान दें और जल्दबाजी में बिकवाली से बचें। Global market pressure का असर अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तय करेंगे। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख सबसे अहम फैक्टर बने रहेंगे।
अगर भू-राजनीतिक हालात में सुधार आता है और तेल की कीमतों में नरमी दिखती है तो बाजार फिर से रिकवरी कर सकता है। लेकिन फिलहाल निवेशकों के बीच सतर्कता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाले Global market pressure कुछ कारोबारी सत्र बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और निवेशकों की नजर हर वैश्विक अपडेट पर टिकी रहेगी।
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