O Romeo film controversy: निर्देशक-संगीतकार विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओ रोमियो’ 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज (O Romeo film controversy) होने जा रही है। लेकिन दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रियाएं आने से पहले ही विशाल ने एक लंबा और भावुक नोट साझा कर फिल्म को लेकर अपनी बात रखी है। खासतौर पर फिल्म में दिखाए गए हिंसात्मक दृश्यों को लेकर उन्होंने खुलकर सफाई दी है और बताया है कि आखिर उन्होंने इतनी तीव्र और हिंसक कहानी क्यों चुनी।
रिलीज से पहले टीम को कहा धन्यवाद
इंस्टाग्राम पर साझा किए गए पोस्ट में विशाल भारद्वाज ने सबसे पहले अपनी पूरी टीम के प्रति आभार जताया। उन्होंने लिखा कि बॉक्स ऑफिस के आंकड़े और आलोचकों की राय आने से पहले वह इस फिल्म (O Romeo film controversy) पर अपना गर्व व्यक्त करना चाहते हैं। उन्होंने अपने विभागाध्यक्षों और तकनीकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह फिल्म केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की मेहनत का परिणाम है जिन्होंने अपने पसीने, समर्पण और ईमानदारी से इसे आकार दिया। विशाल ने कई सहयोगियों के नाम लेकर उन्हें अपना ‘असली हीरो’ बताया। उन्होंने खास तौर पर अपने करीबी सहयोगी अभय दत्त शर्मा और क्रिएटिव प्रोड्यूसर प्रीति शाहानी का जिक्र करते हुए लिखा कि उनके बिना वह यह फिल्म नहीं बना पाते। यह पोस्ट साफ दिखाता है कि ‘ओ रोमियो’ उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा रही है।
‘ओ रोमियो’ मेरे भीतर के प्रेम और हिंसा का प्रतिबिंब
अपने नोट में विशाल भारद्वाज ने फिल्म के मूल भाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्वीकार किया कि इस फिल्म के जरिए उन्हें अपने भीतर मौजूद प्रेम और हिंसा-दोनों की गहराई का एहसास हुआ। उन्होंने लिखा कि जब वह अपने काम को पीछे मुड़कर देखते हैं तो उन्हें एक विषय बार-बार दिखाई देता है-‘बदला’। उनके अनुसार, समाज में फैली नफरत, अन्याय और हिंसा उन्हें भीतर तक आहत करती है। कई बार वह खुद को इन परिस्थितियों के सामने असहाय महसूस करते हैं। विशाल ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि ‘ओ रोमियो’ (O Romeo film controversy) के जरिए उन्होंने अपने भीतर जमा उस गुस्से और पीड़ा को अभिव्यक्ति दी है, जिसे वह वास्तविक जीवन में खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। फिल्म का नायक उन राक्षसों का सामना करता है, जिनसे निर्देशक खुद असल जिंदगी में लड़ नहीं सकते। उनके शब्दों में, यह हिंसा केवल बाहरी नहीं, बल्कि भावनात्मक और प्रतीकात्मक है-एक तरह की आंतरिक मुक्ति।
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हिंसा के ठीक विपरीत खड़ा है प्रेम
विशाल भारद्वाज ने अपने नोट में यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म केवल खून-खराबे की कहानी नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंसा के समानांतर एक और शक्ति खड़ी है-प्रेम।उनके अनुसार, जीवन में मिले संवेदनशील और सुंदर लोगों ने उन्हें संभाला है। यही प्रेम उन्हें टूटने से बचाता रहा है। उन्होंने लिखा कि यह प्रेम ही है जिसने उन्हें ‘रक्त के सागर’ से बाहर निकाला। निर्देशक ने कहा कि ‘ओ रोमियो’ (O Romeo film controversy) दरअसल इन दो चरम भावनाओं प्रेम और प्रतिशोध के बीच फंसे इंसान की कहानी है। यह फिल्म मानव स्वभाव की उन्हीं विरोधाभासी परतों को उजागर करती है, जिनमें कोमलता भी है और क्रूरता भी।
कला और व्यावसायिक सिनेमा के बीच संतुलन
पोस्ट के अंत में विशाल भारद्वाज ने फिल्म को ‘जितनी हिंसक, उतनी ही काव्यात्मक’ बताया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म जितनी व्यापक है, उतनी ही कलात्मक भी है।उनके मुताबिक, यह यात्रा उनके लिए बेहद खास रही है और परिणाम चाहे जो भी हों, वह इन भावनाओं को दर्शकों के साथ साझा करना चाहते थे। रिलीज (O Romeo film controversy) से पहले आया यह भावुक संदेश दर्शाता है कि ‘ओ रोमियो’ केवल एक एक्शन-ड्रामा फिल्म नहीं, बल्कि निर्देशक के व्यक्तिगत अनुभवों और आंतरिक संघर्षों की अभिव्यक्ति है। अब देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इस गहन और हिंसात्मक प्रेम कहानी को किस नजरिए से देखते हैं।
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