एक पल की खुशी, अगले ही पल मातम
कल्पना कीजिए — स्कूल से लौटते बच्चे, रास्ते में लगा एक साधारण सा झूला, और चंद मिनटों की मासूम खुशी। लेकिन उत्तर प्रदेश के चंदौली के मथेला गांव में यही चंद मिनट एक परिवार के लिए उम्रभर का गम बन गए। गोविंद मौर्य की 4 साल की बिटिया साक्षी और उसका 10 साल का भाई क्षितिज, दोनों स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे। रास्ते में नहर पुलिया के पास नीम के पेड़ पर बंधा एक कपड़े का झूला देखकर दोनों रुक गए और झूलने की जिद कर बैठे। किसे पता था कि यह मासूम सी जिद उनकी आखिरी शरारत साबित होगी।
झूला टूटा, पानी में समा गई मासूम
झूलते-झूलते अचानक झूला बेकाबू हो गया और साक्षी सीधे नहर के गहरे पानी में जा गिरी। बहन को डूबता देख भाई क्षितिज ने एक पल भी नहीं गंवाया — वह भी उसे बचाने के लिए पानी में कूद पड़ा। लेकिन नहर का तेज बहाव और गहराई इतनी थी कि दोनों भाई-बहन देखते ही देखते पानी में गुम हो गए। साथ खेल रहे बाकी बच्चे यह मंजर देखकर सन्न रह गए और रोते-चिल्लाते गांव की ओर भागे।
गांव में मची चीख-पुकार, पुलिस-गोताखोर पहुंचे मौके पर
खबर फैलते ही पूरा गांव नहर किनारे उमड़ पड़ा। बलुआ थाना पुलिस को तुरंत सूचना दी गई और गोताखोरों को बुलाकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। घंटों की मशक्कत के बाद दोनों मासूमों के शव पानी से बाहर निकाले जा सके — लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जिस परिवार ने सुबह अपने दो बच्चों को स्कूल भेजा था, शाम होते-होते उनकी गोद सूनी हो गई।
प्रशासन का बयान, गांव वालों में गुस्सा और डर
सकलडीहा डिप्टी एसपी कृष्ण मुरारी शर्मा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बच्ची झूले से अनियंत्रित होकर नहर में गिरी थी और भाई उसे बचाते हुए डूब गया। पुलिस ने शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं गांव वालों में गुस्सा भी है — उनका कहना है कि नहर किनारे पेड़ों पर बंधे ऐसे झूले पहले भी हादसों की वजह बन चुके हैं, फिर भी न कोई चेतावनी बोर्ड लगा, न सुरक्षा जाली। चंदौली हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक मासूमों की जान के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी।


