कहानी की शुरुआत पंजाब से
मुंगेर बच्चा अपहरण मामला बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में है। घटना की जड़ें पंजाब के जालंधर से जुड़ी हैं, जहां रहने वाले हरजेन्द्र कुमार के 18 वर्षीय बेटे की पिछले साल किसी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। बेटे को खोने के सदमे से उसकी पत्नी उबर नहीं पा रही थी और गहरे तनाव में चली गई। रिश्तेदारों और आस-पड़ोस के लोगों ने सुझाव दिया कि घर में एक बच्चा आ जाए तो शायद हालात बदल सकते हैं।
गोद लेने की जगह खरीद-फरोख्त का रास्ता
पुलिस के अनुसार, इसके बाद परिवार ने कानूनी तरीके से गोद लेने के बजाय पैसे देकर बच्चा हासिल करने की योजना बनाई। हरजेन्द्र के घर काम करने वाली एक महिला नीलम ने दावा किया कि वह बिहार से बच्चे का इंतजाम करा सकती है, जिसके लिए तीन लाख रुपये मांगे गए। परिवार तुरंत तैयार हो गया।
बच्चे की फोटो देखकर तय हुआ सौदा
जांच में सामने आया कि नीलम ने मुंगेर के लाल दरवाजा इलाके के एक व्यक्ति से संपर्क किया, जिसने पड़ोस में रहने वाले तीन साल के बच्चे की तस्वीर भेजी। फोटो पसंद आते ही तीन लाख रुपये में सौदा तय हो गया। इसके बाद बच्चे को अगवा करने की साजिश रची गई। पंजाब से परिवार दो दिन पहले ही सड़क मार्ग से पटना पहुंच चुका था। इसके बाद तय योजना के तहत आरोपी अपनी नाबालिग बेटी के साथ पहुंचा और बच्चे को सड़क से उठाकर गाड़ी में बैठा लिया गया।
CCTV फुटेज से खुली परतें
बच्चे के गायब होते ही परिजनों ने शोर मचाया और मामला मुंगेर पुलिस तक पहुंचा। पुलिस टीम ने आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें दो लोग बच्चे को गाड़ी में बैठाते नजर आए। पहचान होने पर पूछताछ शुरू हुई और नाबालिग लड़की के मोबाइल की जांच से पूरी साजिश की परतें खुलती चली गईं।
आरा हाईवे पर रुकी गाड़ी, बच्चा हुआ बरामद
पुलिस को नीलम की लोकेशन भोजपुर के आरा हाईवे के पास मिली। मुंगेर पुलिस ने तुरंत भोजपुर पुलिस से संपर्क कर गाड़ी को हाईवे पर रुकवाया। गाड़ी में मासूम बच्चा सुरक्षित मिला, जिसे तुरंत उसके परिवार को सौंप दिया गया। इस पूरे मामले में पुलिस ने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बच्चे के लिए सौदा करने वाला पंजाब का परिवार, ड्राइवर, बिचौलिया महिला और मुंगेर का वह व्यक्ति शामिल है जिसने बच्चे को अगवा किया। आरोपियों के पास से करीब दो लाख बीस हजार रुपये नकद भी बरामद हुए हैं।
जांच अभी जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह वाकई एक भावनात्मक फैसला था या इसके पीछे बच्चों की खरीद-फरोख्त का कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है। बिचौलिया महिला की भूमिका और उससे जुड़े अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है, जबकि एक अन्य संदिग्ध महिला की तलाश जारी है।


