Revenue Department Reform: छत्तीसगढ़ सरकार ने राजस्व प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि Revenue Department Reform के तहत अब किसी भी स्तर पर लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिकों और किसानों को समयबद्ध, भरोसेमंद और सरल सेवाएं उपलब्ध कराना है।
बैठक के दौरान Revenue Department Reform से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व सेवाओं को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाए ताकि लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार तहसील या पटवारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था तभी सफल मानी जाएगी जब उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
राजस्व मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी सरकार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन के लिए स्पष्ट नीति तय कर दी है। Revenue Department Reform के अंतर्गत हर अधिकारी की जवाबदेही तय होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भूमि विवाद, नामांतरण, सीमांकन, राजस्व अभिलेखों में सुधार और मुआवजा संबंधी मामलों का समयबद्ध समाधान होना चाहिए। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही से नागरिकों को परेशानी होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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डिजिटल किसान सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में किसानों को डिजिटल माध्यम से राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि Revenue Department Reform के तहत बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका और भूमि से जुड़े अन्य दस्तावेज व्हाट्सएप जैसी सुविधाओं के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाएं बढ़ने से किसानों का समय बचेगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी कार्यालयों पर भी अनावश्यक दबाव कम होगा। साथ ही दस्तावेजों की उपलब्धता आसान होने से विवादों में भी कमी आएगी।
राजस्व मामलों का होगा जल्द निपटारा
मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षों से लंबित राजस्व प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से आरबीसी 6-4 के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में संवेदनशीलता और तेजी दोनों जरूरी हैं।
Revenue Department Reform के तहत ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे आवेदक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक भी कर पाएंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक विलंब की संभावना कम होगी।
ई-कोर्ट और साइबर तहसील की दिशा में आगे बढ़ेगा विभाग
बैठक में भविष्य की डिजिटल व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा। इसके अलावा ई-कोर्ट प्रणाली, ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की सुविधा, ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन और नक्शों के डिजिटाइजेशन जैसे विषयों की भी समीक्षा की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि Revenue Department Reform के तहत यदि इन सभी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल सकती है और आम नागरिकों को काफी राहत मिलेगी।
VASUNDHARA परियोजना से डिजिटल होगा पूरा रिकॉर्ड
बैठक में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस परियोजना के माध्यम से जिला और तहसील स्तर पर उपलब्ध सभी महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का डिजिटल संग्रह तैयार किया जाए। Revenue Department Reform के तहत नकल शाखा को भी पूरी तरह ऑनलाइन करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हो सके।
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अबूझमाड़ सहित असर्वेक्षित क्षेत्रों में सर्वे को मिली प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन गांवों का अब तक सर्वे नहीं हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य पूरा किया जाए। विशेष रूप से अबूझमाड़ क्षेत्र में भूमि सर्वेक्षण को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि बिना सर्वे के न तो भूमि रिकॉर्ड तैयार हो सकते हैं और न ही लोगों को राजस्व संबंधी सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सकता है। इसलिए Revenue Department Reform के तहत इस कार्य को समय सीमा में पूरा करना जरूरी है।
स्वामित्व योजना और किसान रजिस्ट्री पर भी हुई समीक्षा
बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टों की प्रविष्टि, नामांतरण, पट्टाधृति अधिनियम-2023, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री और एक्सेम्प्टेड कैटेगरी फार्मर रजिस्ट्री की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल सरकारी रिकॉर्ड तैयार करना नहीं बल्कि किसानों को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराना है। Revenue Department Reform के जरिए भविष्य में सभी रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
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राजस्व विभाग में जल्द होगी भर्ती
बैठक में मानव संसाधन की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक और अन्य रिक्त पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि तहसीलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाए और तहसीलदारों के लिए आवश्यक वाहन सहित अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि प्रशासनिक कार्यों में गति लाई जा सके।
पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने बैठक के अंत में स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव करना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें नागरिकों को तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं मिलें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक सुधार का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचना चाहिए।
सरकार का मानना है कि Revenue Department Reform के प्रभावी क्रियान्वयन से राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और किसानों व आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ पहले की तुलना में अधिक तेज और सरल तरीके से मिल सकेगा। आने वाले समय में डिजिटल तकनीक, ऑनलाइन सेवाओं और जवाबदेही आधारित प्रशासन के जरिए छत्तीसगढ़ का राजस्व विभाग एक नए मॉडल के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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