Sonam Wangchuk Hunger Strike: प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर जारी भूख हड़ताल आंदोलन (Sonam Wangchuk Hunger Strike) अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार उपवास के चलते उनकी सेहत पर असर साफ दिखाई देने लगा है। मेडिकल जांच में वजन कम होने और ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंचने की पुष्टि हुई है।
इसी बीच आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन भी मिलने लगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सागरिका घोष, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक और उनके साथ अनशन पर बैठे छात्रों से मुलाकात की तथा उनके आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की। आंदोलन के बढ़ते समर्थन और वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
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डॉक्टरों ने जताई चिंता, लगातार गिर रहा ब्लड शुगर
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk Hunger Strike) की नियमित स्वास्थ्य जांच कर रहे डॉक्टर नितिन दिघे ने बताया कि लगातार उपवास का असर अब उनके शरीर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार वांगचुक का वजन पिछले तीन दिनों में लगभग 2.4 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 110/70, हृदय गति 77 प्रति मिनट और ऑक्सीजन स्तर 96 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो फिलहाल सामान्य सीमा में है। हालांकि सबसे अधिक चिंता उनके ब्लड शुगर को लेकर जताई गई है।
मेडिकल जांच में उनका ब्लड शुगर स्तर 61 से 64 के बीच पाया गया, जिसे सामान्य से काफी कम माना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक भोजन न लेने की वजह से शरीर की ऊर्जा तेजी से घट रही है और यदि यही स्थिति बनी रही तो स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
सोनम वांगचुक बोले – ‘थोड़ी थकान है, लेकिन हौसला मजबूत है’
स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच सोनम वांगचुक ने स्वयं भी अपनी स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें हल्की थकान महसूस हो रही है, लेकिन वे मानसिक रूप से मजबूत हैं और आंदोलन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि मेडिकल रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक संकेत सामने आए हैं, लेकिन उनका मानना है कि लगातार तीन दिनों से भोजन न करने के कारण ब्लड शुगर का कम होना स्वाभाविक है। वांगचुक ने यह भी बताया कि उनका वजन लगभग दो किलोग्राम कम हुआ है, लेकिन उनका फोकस आंदोलन के उद्देश्य पर बना हुआ है।
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समर्थकों के प्रति जताया आभार
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk Hunger Strike) ने आंदोलन में शामिल छात्रों और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी व्यक्तिगत तकलीफ उन लोगों के बलिदान के सामने बहुत छोटी है, जिन्होंने विभिन्न आंदोलनों के दौरान अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं और छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बलिदान दिया, उनकी तुलना में उनका उपवास बहुत छोटी कीमत है। उन्होंने सभी से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील भी की।
धरना स्थल पर बढ़ा समर्थन
जंतर-मंतर पर जारी इस आंदोलन को धीरे-धीरे विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं का समर्थन मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने वांगचुक से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज ने भी धरना स्थल पहुंचकर छात्रों और आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। समर्थकों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को आंदोलनकारियों की बात सुननी चाहिए।
स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर बढ़ी निगाहें
जैसे-जैसे अनशन के दिन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे डॉक्टरों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक भोजन न लेने से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल वांगचुक लगातार मेडिकल निगरानी में हैं, लेकिन डॉक्टरों ने संकेत दिया है कि यदि स्वास्थ्य में और गिरावट आती है तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
फिलहाल सोनम वांगचुक ने अनशन (Sonam Wangchuk Hunger Strike) समाप्त करने का कोई संकेत नहीं दिया है। दूसरी ओर, बढ़ते जनसमर्थन और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है। यदि जल्द कोई सकारात्मक बातचीत नहीं होती, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
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