Maharana Pratap Jayanti 2026: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती की पूर्व संध्या पर मंगलवार को प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी हैं। अपने विशेष संदेश में मुख्यमंत्री ने मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा प्रताप को याद करते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च स्वाभिमान, अद्वितीय साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन और उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को हमेशा राष्ट्रभक्ति और अपनी मातृभूमि के प्रति सर्वस्व न्योछावर करने की प्रेरणा देता रहेगा।
हिंदू चंद्र कैलेंडर (पंचांग) के अनुसार, साल 2026 में महाराणा प्रताप जयंती बुधवार, 17 जून को मनाई जा रही है। यह पावन पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को बड़े ही हर्षोल्लास और गर्व के साथ मनाया जाता है। मुख्यमंत्री शर्मा ने राज्य के नागरिकों से आह्वान किया कि वे महाराणा प्रताप के महान आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और प्रदेश की उन्नति व राष्ट्र सेवा के प्रति खुद को समर्पित करें ताकि एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सके। (Maharana Pratap Jayanti 2026)
सत्य, धर्म और राष्ट्रहित के प्रतीक थे महाराणा प्रताप
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महाराणा प्रताप के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा, महाराणा प्रताप ने सत्य, धर्म और राष्ट्रहित के मार्ग पर चलते हुए मातृभूमि की रक्षा और आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। सीएम शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस महान शासक का पूरा जीवन अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करने का एक अमूल्य और शाश्वत पाठ है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी उनके मूल्य देश और राज्य को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए पूरी तरह प्रासंगिक हैं। (Maharana Pratap Jayanti 2026)
मुगलों के खिलाफ संघर्ष और अद्वितीय राजपूत गौरव
16वीं शताब्दी के मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप को इतिहास में शक्तिशाली मुगल साम्राज्य के सामने कभी न झुकने और अपने राजपूत स्वाभिमान व स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने साल 1572 में मेवाड़ के सिंहासन को संभाला था। राज्याभिषेक के बाद से लेकर अपनी अंतिम सांस तक, उन्होंने मातृभूमि की मुक्ति, स्वतंत्रता और भारतीय जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया। (Maharana Pratap Jayanti 2026)
हल्दीघाटी और देवेर का ऐतिहासिक युद्ध
महाराणा प्रताप के शौर्य की गाथाएं भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं। साल 1576 में लड़ा गया हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध उनकी अदम्य वीरता, अद्वितीय सैन्य रणनीति और असीम साहस का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। इस युद्ध में उन्होंने अकबर की विशाल सेना को नाकों चने चबवा दिए थे। इसके बाद, साल 1582 में हुए ‘देवेर के युद्ध’ (Battle of Dewair) में महाराणा प्रताप ने एक निर्णायक और ऐतिहासिक जीत हासिल की। इस ऐतिहासिक विजय ने मेवाड़ राज्य को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने की ताकत दी और इसके बाद मेवाड़ सामाजिक व सांस्कृतिक प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा। (Maharana Pratap Jayanti 2026)
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चावंड को बनाया राजधानी और अमर विरासत
अपनी सैन्य सफलताओं और मेवाड़ के अधिकांश हिस्से को दोबारा जीतने के बाद, महाराणा प्रताप ने साल 1585 में ‘चावंड’ (Chawand) को अपनी नई राजधानी के रूप में स्थापित किया। उन्होंने यहां से अपनी प्रजा के कल्याण और संस्कृति के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। साल 1597 में इस महान योद्धा का निधन हो गया, लेकिन उनकी वीरता, त्याग और स्वाभिमान की अमर विरासत आज भी हर भारतीय के दिल में जिंदा है।
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