Alia Bhatt on Male Centric Movies: फ्रांस में चल रहे Cannes Film Festival में इस बार भारतीय सितारों की खास मौजूदगी देखने को मिल रही है। इसी बीच बॉलीवुड अभिनेत्री Alia Bhatt ने भारतीय सिनेमा में मेल सेंट्रिक (Alia Bhatt on Male Centric Movies) फिल्मों को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हो रही है। कान्स में ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ से बातचीत के दौरान आलिया से पूछा गया कि भारत में आज भी ज्यादातर फिल्में पुरुष दर्शकों को ध्यान में रखकर क्यों बनाई जाती हैं। इस सवाल का जवाब देते हुए आलिया ने न सिर्फ मौजूदा फिल्म ट्रेंड पर बात की, बल्कि यह भी बताया कि अब सिनेमा को जेंडर के दायरे से बाहर निकलने की जरूरत है।
‘हम बेहद दिलचस्प दौर में जी रहे हैं’
आलिया भट्ट ने बातचीत के दौरान कहा, ‘मौजूदा हालात पर नजर डालें तो मुझे ऐसा लगता है कि आज हम एक बेहद ही दिलचस्प दौर में जी रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर नजर डालें तो आप उन फिल्मों को देखेंगे, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल रही हैं। ‘बार्बी’, ‘वुदरिंग हाइट्स’ और ‘द डेविल वियर्स प्राडा 2’ कुछ बड़े उदाहरण हैं। कुछ और भी ऐसी फिल्में होंगी। और इन फिल्मों की मेन ऑडियंस महिलाएं थी। महिलाओं ने इन फिल्मों के लिए थिएटर्स का रुख किया और ये फिल्में हिट रहीं।’ आलिया का यह बयान (Alia Bhatt on Male Centric Movies) ऐसे समय आया है, जब दुनिया भर में महिला केंद्रित फिल्मों को दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
भारतीय फिल्मों में मेल ऑडियंस को क्यों दिया जाता है ज्यादा महत्व?
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री पर बात करते हुए आलिया ने कहा कि यहां लंबे समय से यह सोच बनी हुई है कि फिल्मों का बड़ा दर्शक वर्ग पुरुषों का है। उन्होंने कहा,’जब हम भारत की बात करते हैं, तो अक्सर एक बात सामने आती है कि यहां फिल्म देखने वालों की संख्या 75 प्रतिशत पुरुषों की है। हमें मास ऑडियंस को ध्यान में रखकर फिल्में बनानी होंगी। मुझे लगता है कि अगर हम सिर्फ मेल ऑडियंस (Alia Bhatt on Male Centric Movies) को ध्यान में रखकर फिल्में बनाएंगे तो महिलाओं का क्या होगा?’ उनके इस बयान को इंडस्ट्री के अंदर बदलती सोच और कंटेंट आधारित सिनेमा की ओर इशारा माना जा रहा है।
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‘फिल्में जेंडर से परे होनी चाहिए’
आलिया भट्ट ने साफ तौर पर कहा कि फिल्मों को मेल या फीमेल सेंट्रिक कहने से ज्यादा जरूरी उसकी कहानी होती है। उन्होंने कहा, ‘मेरा ये नहीं कहना है कि किसी को अलग कर दिया जाए। हमें किसी को क्यों (Alia Bhatt on Male Centric Movies) अलग करना है? हम ऐसी फिल्में क्यों नहीं बना सकते हैं, जो जेंडर से परे हों। और उन फिल्मों का सेंटर कहानी हो। इसलिए फिल्म मेल सेंट्रिक हो या फिर फीमेल सेंट्रिक, इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। महत्व कहानी को ही देना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि ऐसी फिल्में बनेंगी।’ उनकी इस सोच को सोशल मीडिया पर भी काफी समर्थन मिल रहा है। कई यूजर्स का कहना है कि आज के दौर में दर्शक सिर्फ अच्छी कहानी देखना चाहते हैं, चाहे उसका केंद्र पुरुष हो या महिला। (Alia Bhatt on Male Centric Movies)
कंटेंट आधारित फिल्मों का बढ़ रहा दौर
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सिनेमा में कंटेंट आधारित फिल्मों का चलन तेजी से बढ़ा है। महिला किरदारों पर आधारित कई फिल्मों और वेब सीरीज को दर्शकों ने पसंद किया है। ऐसे में आलिया भट्ट का यह बयान इंडस्ट्री के बदलते माहौल को और मजबूती देता नजर आ रहा है। कान्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिया गया यह बयान भारतीय सिनेमा में नई बहस छेड़ सकता है कि आखिर फिल्मों का असली केंद्र दर्शक का जेंडर होना चाहिए या दमदार कहानी। (Alia Bhatt on Male Centric Movies)



