Prashant Kishor on Samrat Choudhary: बिहार की सियासत में आए बड़े बदलाव के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में अपना विश्वासमत (फ्लोर टेस्ट) हासिल कर लिया है। हालांकि, इस जीत पर ‘जन सुराज’ के सूत्रधार और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। खगड़िया में पत्रकारों से बात करते हुए पीके ने नई सरकार के बहुमत पर गंभीर सवाल खड़े किए और इसे जनता के समर्थन के बजाय सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का परिणाम बताया।
Prashant Kishor ने सीधे तौर पर भाजपा और केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह बहुमत ‘लोकप्रियता’ का नहीं बल्कि ‘प्रबंधन’ का है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दरवाजे से सत्ता हासिल करने के लिए लोकतंत्र की गरिमा को ताक पर रखा गया। पीके के अनुसार, अगर यह सच में जनता का विश्वास होता, तो समीकरण कुछ और ही होते, लेकिन यहाँ सिर्फ संख्या बल को जोड़-तोड़ कर पेश किया गया है। (Prashant Kishor on Samrat Choudhary)
’10 हजार रुपये और सरकारी तंत्र से खरीदा बहुमत’
Prashant Kishor ने सम्राट चौधरी की जीत पर तंज कसते हुए कहा, ‘यह जो बहुमत आज सदन में दिख रहा है, वह लोकप्रियता का नहीं है। यह 10 हजार रुपये से खरीदा हुआ और चुनाव आयोग की कथित मदद से हासिल किया गया बहुमत है। सरकारी तंत्र का पूरी तरह से दुरुपयोग किया गया है ताकि सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा जा सके।’ उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने नीतीश कुमार को रास्ते से हटाकर अपने व्यक्ति को बैठाया है, उन्होंने ही इस पूरी पटकथा को अंजाम दिया है।(Prashant Kishor on Samrat Choudhary)
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‘सम्राट चौधरी नहीं, मोदी-शाह की पसंद’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की योग्यता पर सवाल उठाते हुए पीके ने कहा कि उन्हें बिहार की जनता ने नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मुख्यमंत्री बनाया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘सम्राट चौधरी का चाल, चरित्र और चेहरा जन सुराज ने पहले ही जनता के सामने उजागर कर दिया था। उन्हें किसी अदालत ने बरी नहीं किया है, बल्कि सिर्फ ‘नाबालिग’ होने के तकनीकी आधार पर राहत मिली हुई है।’ (Prashant Kishor on Samrat Choudhary)
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पहचान और डिग्री को लेकर बड़ा दावा
Prashant Kishor ने सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता और पहचान पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा,’ये ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका असली नाम तक किसी को ठीक से पता नहीं है राकेश कुमार, राकेश कुमार मौर्य या सम्राट चौधरी। उनकी जन्मतिथि को लेकर भी भ्रम है कि वे 1981 में जन्मे या 1968 में। हैरानी की बात यह है कि उनके एक हलफनामे (Affidavit) में वे खुद को 7वीं पास बताते हैं, जबकि दूसरे में उन्होंने अमेरिका से D.LIT करने का दावा किया है।’ (Prashant Kishor on Samrat Choudhary)
बिहार की राजनीति में नया मोड़
Prashant Kishor के इस बयान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार को हटाकर भाजपा ने अपने जिस मोहरे को आगे किया है, वह बिहार के विकास के लिए नहीं बल्कि सत्ता के समीकरणों को साधने के लिए है। खगड़िया से शुरू हुआ पीके का यह जुबानी हमला आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करता दिख रहा है। (Prashant Kishor on Samrat Choudhary)
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