Ukraine War Crisis: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने अब भारतीय नागरिकों के लिए भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। Ukraine War Crisis के बीच रूसी सेना में शामिल होकर लड़ रहे 32 भारतीयों की मौत की खबर ने देश को झकझोर दिया है। इसके अलावा कई भारतीय अब भी वहां फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
लालच देकर जंग में झोंके जा रहे भारतीय
सूत्रों के मुताबिक, कई भारतीय युवाओं को नौकरी के नाम पर रूस बुलाया गया था। उन्हें आकर्षक वेतन, बोनस और स्थायी नागरिकता का लालच दिया गया। लेकिन रूस पहुंचने के बाद उन्हें जबरन सेना में भर्ती कर लिया गया और Ukraine War Crisis के बीच मोर्चे पर भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि एजेंट विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को निशाना बना रहे हैं। उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता है कि उन्हें सुरक्षित नौकरी मिलेगी, लेकिन हकीकत में उन्हें युद्ध के मैदान में उतार दिया जाता है।
बढ़ती मौतें और लापता भारतीय
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले 26 भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 32 हो गई है। वहीं, लापता लोगों की संख्या भी बढ़कर 12 तक पहुंच चुकी है।
Read More: ट्रंप का सीजफायर गेम, ईरान-होर्मुज से बदलती दुनिया
करीब 214 भारतीयों के रूसी सेना में भर्ती होने की बात सामने आई है। इनमें से 135 को अब तक सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, लेकिन अभी भी 35 भारतीयों की वापसी की प्रक्रिया जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने Ukraine War Crisis को भारत के लिए मानवीय संकट में बदल दिया है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
जंग में मारे गए भारतीयों के शव हाल के दिनों में उनके घर पहुंचाए गए हैं। जम्मू के अखनूर में 24 वर्षीय सचिन खजूरिया का शव पहुंचा, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
इसी तरह पंजाब के मंजिंदर सिंह और हरियाणा के गीतिक शर्मा के परिवारों पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों का कहना है कि उनके बच्चों को नौकरी के नाम पर विदेश भेजा गया था, लेकिन उन्हें युद्ध में झोंक दिया गया। इन घटनाओं ने Ukraine War Crisis के मानवीय पहलू को और अधिक गंभीर बना दिया है।
Read : ईरान को बचाने के चक्कर में फंसा पाकिस्तान, होर्मुज संकट पर वोटिंग से भागने पर भड़के खाड़ी देश
भारत-रूस संबंधों पर असर
यह मुद्दा अब केवल मानवीय संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी असर डाल रहा है। भारत और रूस के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन भारतीय नागरिकों की जबरन भर्ती की खबरों ने दोनों देशों के बीच बातचीत को जरूरी बना दिया है।
भारतीय अधिकारियों और मॉस्को स्थित दूतावास द्वारा लगातार रूसी प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है ताकि फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।
कैसे होता है पूरा नेटवर्क काम?
जानकारी के अनुसार, एजेंट पहले लोगों को रूस में सामान्य काम जैसे निर्माण कार्य, सफाई या तकनीकी नौकरियों का ऑफर देते हैं। इसके बाद उन्हें वहां पहुंचाकर अलग-अलग तरीकों से सेना में भर्ती के लिए मजबूर किया जाता है।
कई मामलों में पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं, जिससे पीड़ितों के पास कोई विकल्प नहीं बचता। इस तरह का नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा है, जो Ukraine War Crisis के दौरान और अधिक सक्रिय हो गया है।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
सरकार की कार्रवाई और अपील
भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। साथ ही नागरिकों को आगाह किया गया है कि वे विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध ऑफर्स से सतर्क रहें। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी अनधिकृत एजेंट या वेबसाइट के माध्यम से विदेश जाने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है, यदि इस तरह की अवैध भर्ती पर रोक नहीं लगाई गई। Ukraine War Crisis ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक संघर्षों का असर अब सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। ऐसे में सरकार और समाज दोनों को मिलकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारतीयों की मौत और फंसे हुए लोगों की स्थिति एक बड़ा मानवीय संकट बन चुकी है। बेहतर समन्वय, सख्त कार्रवाई और जागरूकता ही इस समस्या का समाधान हो सकते हैं।
पढ़े ताजा अपडेट: Hindi News, Today Hindi News, Breaking News



