Pakistan abstain from UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में होर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर हुई वोटिंग ने पाकिस्तान के कूटनीतिक दोगलेपन को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। अमेरिका के बेहद करीबी सहयोगी बहरीन द्वारा लाए गए ईरान विरोधी प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान पाकिस्तान नदारद (Abstain) रहा। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान उन गिने-चुने देशों में शामिल था, जिन्होंने न तो प्रस्ताव का समर्थन किया और न ही विरोध। पाकिस्तान का यह फैसला न केवल वाशिंगटन बल्कि रियाद और मनामा के लिए भी एक बड़ा झटका है। खाड़ी देशों, विशेषकर बहरीन और सऊदी अरब ने पाकिस्तान के इस ‘मौन’ को एक कूटनीतिक विश्वासघात के रूप में देखा है, जिसके गंभीर आर्थिक और रणनीतिक परिणाम इस्लामाबाद को भुगतने पड़ सकते हैं।
इस कूटनीतिक चाल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को भी सीधे तौर पर चुनौती दी है, जो इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे थे। पाकिस्तान वर्तमान में एक ऐसी कशमकश में फँसा है जहाँ एक तरफ उसका ‘आका’ अमेरिका और उदार कर्जदाता सऊदी अरब हैं, तो दूसरी तरफ पड़ोसी ईरान है जिससे उसे गैस पाइपलाइन और सीमा सुरक्षा की चिंताएं हैं। बहरीन के प्रस्ताव पर तटस्थ रहकर पाकिस्तान ने यह संदेश दिया है कि वह ईरान को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। हालांकि, जानकारों का मानना है कि दो नावों पर पैर रखने की यह कोशिश पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह अलग-थलग कर सकती है और उसकी बची-कुची साख पर भी बट्टा लगा सकती है। Pakistan abstain from UNSC
किस देश ने क्या कहा
वोटिंग के दौरान महाशक्तियों के बीच वाकयुद्ध देखने को मिला। रूस के दूत वासिली नेबेंजिया ने तर्क दिया कि ‘प्रस्ताव एकतरफा था और शांति पहल को कमजोर कर सकता था।’ वहीं, चीन के राजदूत फू कोंग ने कहा कि ‘मसौदा एकतरफा निंदा और दबाव पर आधारित था।’ इसके विपरीत, अमेरिकी दूत माइक वाल्ट्ज ने रूस-चीन के वीटो और पाकिस्तान की अनुपस्थिति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘सुरक्षा परिषद के लिए एक नया निचला स्तर’ करार दिया। Pakistan abstain from UNSC
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‘जंगल’ बन जाएगी दुनिया’
बहरीन के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के रुख पर सख्त नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि ‘ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग को हथियार बना लिया है।’ खाड़ी देशों का मानना है कि यदि आज ईरान की इस शत्रुतापूर्ण कार्यप्रणाली को नहीं रोका गया, तो दुनिया ‘जंगल’ में तब्दील हो जाएगी जहाँ कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर समुद्री रास्तों को बंद कर देगा। सऊदी अरब, जो पाकिस्तान की कंगाली में उसका सबसे बड़ा मददगार रहा है, अब आर्थिक मदद से हाथ खींच सकता है। Pakistan abstain from UNSC

पाकिस्तान के लिए ‘मुसीबत का ट्रिपल डोज’
पाकिस्तान का यह फैसला उसके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है:
FATF और अमेरिकी पाबंदियां: ट्रंप प्रशासन ईरान के समर्थकों के प्रति सख्त है। पाकिस्तान को फिर से ‘ग्रे लिस्ट’ या अन्य आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
खाड़ी देशों से डिस्कनेक्ट: सऊदी अरब और बहरीन पाकिस्तान में निवेश के सबसे बड़े स्रोत हैं। यदि उन्होंने हाथ खींच लिए, तो पाकिस्तान के लिए पेट्रोल और पैसा दोनों का संकट पैदा हो जाएगा।
ईरान का अविश्वास: इतनी बड़ी कूटनीतिक कीमत चुकाने के बाद भी ईरान को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है। सीमा विवाद और बलूच उग्रवादियों का मुद्दा दोनों के बीच हमेशा तनाव बनाए रखता है। Pakistan abstain from UNSC
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पाकिस्तान के राजदूत का बचाव
पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा, ‘स्थिति गंभीर है, लेकिन निरंतर संवाद और जुड़ाव की अनुमति देने के लिए राजनयिक गुंजाइश बनाए रखना आवश्यक है।’ हालांकि, यह दलील अमेरिका और अरब देशों के गले नहीं उतर रही है, जो इसे सीधे तौर पर ‘पीठ में छुरा घोंपना’ मान रहे हैं। Pakistan abstain from UNSC



