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अंतर्राष्ट्रीय

Russia Iran Friendship: ईरान के लिए ‘ढाल’ बने रूस और चीन! सुरक्षा परिषद में गिराया अमेरिका का प्रस्ताव, अब क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप?

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-04-07 10:36 अपराह्न
By Lokhit Kranti 5 महीना ago
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UN Security Council
Russia Iran Friendship: ईरान के लिए 'ढाल' बने रूस और चीन! सुरक्षा परिषद में गिराया अमेरिका का प्रस्ताव, अब क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप?
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UN Security Council: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान को लेकर जारी हफ्तों के कूटनीतिक ड्रामे का अंत बेहद चौंकाने वाला रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बलपूर्वक खुलवाने और ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए अमेरिका के करीबी सहयोगी बहरीन द्वारा लाए गए ‘गल्फ ड्राफ्ट रिजॉल्यूशन’ को रूस और चीन ने अपने विशेषाधिकार ‘वीटो’ का इस्तेमाल कर गिरा दिया है। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में वोटिंग के दौरान 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान से दूरी बनाए रखी। अमेरिका को उम्मीद थी कि भारी बहुमत के दबाव में रूस और चीन पीछे हट जाएंगे, लेकिन इसके विपरीत दोनों महाशक्तियों ने ईरान का साथ देकर वाशिंगटन को बड़ा झटका दिया है।

Contents
‘चैप्टर 7’ का डर और कूटनीतिक दांवपेचबहरीन की तीखी चेतावनी और वैश्विक व्यापार का खतराईरान के साथ क्यों आए रूस और चीन?आगे क्या? बारूद के ढेर पर खड़ी दुनिया

इस प्रस्ताव के गिरने से अब अमेरिका और उसके सहयोगियों के पास ईरान के खिलाफ कानूनी रूप से सैन्य कार्रवाई करने का कोई वैश्विक रास्ता नहीं बचा है। बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुललतीफ बिन राशिद अल ज़यानी ने वोटिंग से पहले चेतावनी दी थी कि ईरान ने होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को ‘हथियार’ बना लिया है, जिससे पूरी दुनिया एक ‘जंगल’ में बदल सकती है। हालांकि, रूस और चीन ने इसे पश्चिमी देशों की ईरान विरोधी साजिश करार दिया। अब जब राष्ट्रपति ट्रंप की डेडलाइन सिर पर है और संयुक्त राष्ट्र से कोई मदद नहीं मिली है, तो सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिका और इजरायल बिना यूएन की मंजूरी के अकेले ही कोई सैन्य कदम उठाएंगे? अगर ऐसा होता है, तो खाड़ी क्षेत्र में महायुद्ध की आहट और तेज हो जाएगी। UN Security Council

‘चैप्टर 7’ का डर और कूटनीतिक दांवपेच

इस पूरे विवाद की जड़ में संयुक्त राष्ट्र चार्टर का ‘चैप्टर VII’ था। सुरक्षा परिषद के नियमों के अनुसार, चैप्टर 7 के तहत पारित किसी भी प्रस्ताव का अर्थ होता है- ‘शांति बहाली के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की अनुमति’। शुरुआत में अमेरिका और बहरीन चाहते थे कि इस प्रस्ताव में ईरान पर सीधे सैन्य हमले की छूट मिले। लेकिन जब रूस और चीन ने कड़ा रुख अपनाया, तो प्रस्ताव की भाषा को कई बार बदला और हल्का किया गया। अंत में इसे सिर्फ ‘रक्षात्मक प्रयासों’ तक सीमित कर दिया गया था, फिर भी रूस-चीन ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह ईरान पर हमले का आधार बन सकता है। UN Security Council

read also: Middle East Tension: ट्रंप की चेतावनी से कांपी दुनिया! जंग के आसार तेज

UN Security Council Veto
UN Security Council Veto

बहरीन की तीखी चेतावनी और वैश्विक व्यापार का खतरा

बैठक की अध्यक्षता कर रहे बहरीन के विदेश मंत्री ने वैश्विक समुदाय को आगाह करते हुए कहा, ‘ईरान का व्यवहार शत्रुतापूर्ण है। अगर आज हमने होर्मुज में उसकी मनमानी नहीं रोकी, तो कल दुनिया के बाकी व्यापारिक जलमार्ग भी असुरक्षित हो जाएंगे।’ खाड़ी देशों का तर्क था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप जरूरी है। लेकिन रूस और चीन ने साफ कर दिया कि वे किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे जो मध्य पूर्व में पश्चिमी देशों के सैन्य प्रभुत्व को बढ़ाता हो। UN Security Council

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ईरान के साथ क्यों आए रूस और चीन?

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन के इस कदम के पीछे गहरे सामरिक और आर्थिक हित छिपे हैं। (UN Security Council)

रूस की मजबूरी: यूक्रेन युद्ध के बाद से तेहरान और मॉस्को के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर हैं। रूस अपने सबसे भरोसेमंद सैन्य सहयोगी ईरान को कमजोर होते नहीं देखना चाहता।

चीन की ऊर्जा सुरक्षा: चीन की अर्थव्यवस्था के लिए मध्य पूर्व से आने वाला तेल जीवन रेखा है। उसे डर है कि अगर होर्मुज में अमेरिका का दबदबा बढ़ा, तो उसके व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा वाशिंगटन के हाथों में चली जाएगी। UN Security Council

पढ़े ताजा अपडेट:  Hindi News, Today Hindi News, Breaking News

आगे क्या? बारूद के ढेर पर खड़ी दुनिया

वीटो के बाद अब गेंद अमेरिका के पाले में है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही होर्मुज खोलने के लिए अंतिम चेतावनी दे रखी है। यूएन में कानूनी हार के बाद अब अमेरिका के पास केवल दो ही रास्ते बचते हैं- या तो वह कूटनीति के जरिए ईरान से बात करे, या फिर अंतरराष्ट्रीय कानून की परवाह किए बिना ‘यूनिलैटरल’ (एकतरफा) सैन्य कार्रवाई करे। अगर अमेरिका हमला करता है, तो रूस और चीन की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। UN Security Council

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