US-Iran War Ceasefire: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध को आज 37 दिन बीत चुके हैं और दुनिया की सांसें थमी हुई हैं। अब तक इस संघर्ष में 3,500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए दी गई अंतिम चेतावनी (डेडलाइन) आज खत्म हो रही है, जिससे तनाव अपने चरम पर है। इस बीच, पाकिस्तान, चीन, मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देश इस युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक गलियारों में सक्रिय हो गए हैं।
रॉयटर्स और एक्सियोस की रिपोर्टों के अनुसार, शांति बहाली के लिए इस समय कई प्रस्ताव मेज पर हैं, जिनमें ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ सबसे मजबूत बनकर उभरा है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस सिलसिले में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ लगातार संपर्क में हैं। हालांकि, जंग पर अंतिम मुहर ईरान की सहमति पर टिकी है, जिसने फिलहाल अपनी शर्तों को लेकर कड़ा रुख अपना रखा है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए महायुद्ध को टाला जा सकेगा या आज की डेडलाइन तबाही का नया अध्याय लिखेगी। (US-Iran War Ceasefire)
‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ और पाकिस्तान की मध्यस्थता
पाकिस्तान ने शांति के लिए जो फ्रेमवर्क तैयार किया है, उसे ‘इस्लामाबाद अकॉर्ड’ का नाम दिया गया है। इस प्रस्ताव के तहत तुरंत सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की बात कही गई है। योजना यह है कि शुरुआती शांति के बाद अगले 15-20 दिनों के भीतर एक स्थायी समझौता तैयार किया जाए। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने रात भर अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों से बातचीत की है, ताकि इस्लामाबाद में आमने-सामने की अंतिम वार्ता का रास्ता साफ हो सके। (US-Iran War Ceasefire)
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ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदार और गहरे आर्थिक साझेदार होने के नाते चीन इस पूरी डील में ‘गेम चेंजर’ की भूमिका में है। पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान, चीन और अमेरिका मिलकर एक अस्थायी सीजफायर के प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहे हैं। चीन ने तेहरान को स्पष्ट संदेश भेजा है कि अब जंग बंद करने का सही समय है। चीन का दबदबा ईरान को समझौते की मेज पर लाने के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। (US-Iran War Ceasefire)
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अमेरिका का ‘टू-फेज डील’ प्लान
एक्सियोस की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका एक ‘टू-फेज डील’ पर विचार कर रहा है। इसके पहले चरण में 45 दिनों का सीजफायर होगा, जिसके बाद युद्ध खत्म करने का रोडमैप बनेगा। इस प्रस्ताव के तहत ईरान को परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी देनी होगी, जिसके बदले में अमेरिका उस पर लगे प्रतिबंध हटाएगा और जमे हुए फंड को रिलीज करेगा। साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट के लिए एक नया रीजनल फ्रेमवर्क बनाने का सुझाव भी दिया गया है। (US-Iran War Ceasefire)

ईरान की 10 सूत्रीय शर्तें और कड़ा रुख
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, तेहरान ने फिलहाल अस्थायी सीजफायर के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से मना कर दिया है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 10 बिंदुओं का एक जवाबी प्रस्ताव भेजा है। ईरान की मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं-
पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और इजराइली हमले तुरंत बंद हों।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए सहायता और प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए।
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से पहले सभी सैन्य कार्रवाइयों पर विराम लगे। (US-Iran War Ceasefire)
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मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब की भूमिका
मिस्र और तुर्की ने मिलकर एक अलग शांति पहल की है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को ‘तटस्थ जलमार्ग’ घोषित करने की मांग की गई है। वहीं, सऊदी अरब सार्वजनिक रूप से तो शांति का समर्थन कर रहा है, लेकिन खुफिया रिपोर्टों के अनुसार क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने पर्दे के पीछे से अमेरिका को दबाव बनाए रखने का इशारा किया है। हालांकि, तेल की सप्लाई रुकने से सऊदी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है, जिससे उनका रुख भी अब नरम पड़ता दिख रहा है। (US-Iran War Ceasefire)



