CJI Surya Kant Warning: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान एक गंभीर मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट में पता चला कि इस केस से जुड़े एक व्यक्ति ने उनके भाई को फोन किया और फैसले पर प्रभाव डालने की कोशिश की। यह सुनते ही CJI ने गहरी नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि अदालत के काम में किसी भी तरह का दखल अस्वीकार्य है।
CJI Surya Kant Warning: नाराजगी जताई
CJI ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जज या उनके परिवार से संपर्क करके कोर्ट के निर्णय को प्रभावित नहीं कर सकता। उन्होंने वकील से पूछा कि क्या उन्हें अपने मुवक्किल की इस हरकत का पता था। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसा करना अदालत की अवमानना माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
CJI Surya Kant Warning: मामला छात्रों से जुड़ा
यह मामला हरियाणा के दो छात्रों से जुड़ा है। ये छात्र सामान्य वर्ग के हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने के लिए बौद्ध धर्म अपनाने का दावा कर रहे थे। उनका कहना था कि अब वे बौद्ध हैं और इस वजह से अल्पसंख्यक कोटे का लाभ लेना चाहते हैं।
CJI Surya Kant Warning: कोर्ट को शक हुआ
जजों को लगता है कि छात्रों ने सिर्फ एडमिशन पाने के लिए धर्म बदला है। कोर्ट ने इसके प्रमाणों की जांच के आदेश दिए थे। यह देखने के लिए कि क्या उनका धर्म परिवर्तन वास्तविक है या सिर्फ नियमों का लाभ उठाने की कोशिश है।
CJI Surya Kant Warning: फोन करने का मामला सामने आया
सुनवाई के दौरान पता चला कि वकील के मुवक्किल के पिता ने CJI के भाई को फोन किया और फैसले के बारे में सवाल किया। यह सुनकर कोर्ट में सभी लोग हैरान रह गए। CJI ने सवाल किया कि क्या अब लोग जजों को यह बताने लगेंगे कि उन्हें क्या फैसला करना है?
CJI Surya Kant Warning: सख्त चेतावनी दी
CJI सूर्या कांत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी को अदालत को डिक्टेट करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसा प्रयास दोबारा किया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे ऐसे मामलों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं।
CJI Surya Kant Warning: वकील का जवाब
वकील ने बताया कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसने कोर्ट से माफी मांगी और कहा कि वह अपने मुवक्किल से बात करेगा। कोर्ट ने भी सुझाव दिया कि यदि मुवक्किल गलत है तो केस वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। सुनवाई और जांच अब जारी है।
CJI Surya Kant Warning: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जोर
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सर्वोपरि है। कोई भी व्यक्ति या संस्था अदालत के निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। CJI सूर्या कांत ने न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाया और भविष्य में किसी भी दखल को नकारने का संदेश दिया।



