India Energy Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ता दिख रहा है। कच्चे तेल के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब खतरे में है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, साथ ही इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर हालात और बिगड़े तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराया संकट
व्हाइट हाउस की पूर्व अधिकारी लिसा कर्टिस ने साफ तौर पर कहा है कि ईरान-अमेरिका तनाव भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट सीधे अर्थव्यवस्था पर असर डालती है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि सबसे पहले, इसका असर भारत की तेल सप्लाई पर पड़ रहा है. भारत असल में मिडिल ईस्ट से आने वाले तेल पर निर्भर है, इसलिए मुझे यकीन है कि भारतीय अधिकारी तेल की बढ़ती कीमतों और इस संकट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर बहुत चिंतित हैं.’
अमेरिका की कार्रवाई से बढ़ी डिप्लोमैटिक टेंशन
लिसा कर्टिस ने अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि भारत की मेजबानी में हुए एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभियान के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरानी जहाज पर हमला किया, जिससे भारत के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ने भारत की मेजबानी में हुई नौसैनिक अभियान, एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभियान में हिस्सा लेने के तुरंत बाद एक ईरानी जहाज पर हमला किया.’ (India Energy Crisis)
‘नियम-आधारित व्यवस्था’ पर उठे सवाल
भारत हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों और समुद्री रास्तों की सुरक्षा का समर्थक रहा है। लेकिन इस बार अमेरिका की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्टिस के मुताबिक, ‘भारत अमेरिका को एक जिम्मेदार देश के तौर पर देखता है और समुद्री रास्तों की आजादी की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन, इस मामले में यह अमेरिका है जो उस नियम-आधारित व्यवस्था में रुकावट डालने वाले तरीके से काम कर रहा है.’ (India Energy Crisis)

भारत की संतुलन नीति की परीक्षा
मौजूदा हालात में भारत एक मुश्किल कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, तो दूसरी ओर ईरान के साथ भी उसके लंबे समय से मजबूत रिश्ते रहे हैं। कर्टिस ने कहा, ‘भारत, ज्यादा न्यूट्रल रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है. वह ईरान के साथ मजबूत संबंधों को अमेरिका के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की अहमियत के साथ संतुलित कर रहा है.’ (India Energy Crisis)
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सहयोगी देश भी दूरी बना रहे हैं
अमेरिका की ईरान नीति को लेकर उसके सहयोगी देश भी असहज नजर आ रहे हैं। जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देश इस संघर्ष में सीधे शामिल होने से बच रहे हैं। कर्टिस के अनुसार, ‘मुझे लगता है कि जब ईरान में सैन्य ऑपरेशन की बात आती है तो अमेरिका अपने बड़े सहयोगियों और साझेदारों से अलग-थलग पड़ गया है. (India Energy Crisis)



