Durand Line Conflict: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अब छोटी-मोटी झड़पों से बढ़कर खुली लड़ाई में बदलता दिख रहा है। डूरंड लाइन पर फायरिंग और एयरस्ट्राइक ने पूरे इलाके में उथल-पुथल मचा दी है। अफ़गान तालिबान ने दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई मिलिट्री पोस्ट पर कब्जा कर लिया गया। जवाब में, पाकिस्तान ने कई एयरस्ट्राइक किए। हालात बिगड़ गए हैं, जिससे पेशावर से इस्लामाबाद तक सिक्योरिटी एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
Durand Line Conflict: डूरंड लाइन – झगड़े की जड़ क्या है?
1893 में खींची गई डूरंड लाइन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच झगड़े की एक बड़ी वजह बनी हुई है। अफगानिस्तान ने कभी भी इस बॉर्डर को ऑफिशियली मान्यता नहीं दी है। जब से अफगान तालिबान ने काबुल में सत्ता संभाली है, बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है।
अफ़गानिस्तान के रूलिंग तालिबान ग्रुप का दावा है कि पाकिस्तान बॉर्डर पर जबरदस्ती फेंसिंग कर रहा है, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि वह आतंकवाद को रोकने के लिए यह कदम उठा रहा है। यह टकराव अब मिलिट्री लड़ाई में बदल गया है।
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Durand Line Conflict: पेशावर से इस्लामाबाद तक धमाकों की गूंज
यह लड़ाई डूरंड लाइन पर भारी गोलीबारी के साथ शुरू हुई। अफगान पक्ष ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने बॉर्डर पार हवाई हमले किए, जिसमें आम लोगों के इलाकों को निशाना बनाया गया। जवाब में, अफगान तालिबान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में कई धमाकों की खबरें आईं। इस बीच, राजधानी इस्लामाबाद में सिक्योरिटी कड़ी कर दी गई, और सरकारी इमारतों और मिलिट्री हेडक्वार्टर के आसपास भारी तैनाती की गई।
सूत्रों के मुताबिक, अफगान सेना ने कुछ फॉरवर्ड पोस्ट पर कब्जा करने का भी दावा किया है, हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों से इनकार किया है।
Durand Line Conflict: एयरस्ट्राइक और काउंटरअटैक – किसका पलड़ा भारी है?
पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि उसने बॉर्डर पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस बीच, अफगान तालिबान ने इसे सीधा हमला बताया है और जवाबी कार्रवाई करने की कसम खाई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह लड़ाई सिर्फ बॉर्डर विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे पॉलिटिकल और स्ट्रेटेजिक कारण हैं।
जब से 2021 में अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा है और तालिबान ने सत्ता संभाली है, काबुल और इस्लामाबाद के बीच रिश्ते खराब हो गए हैं। पाकिस्तान पर अक्सर तालिबान का साथ देने का आरोप लगता रहा है, लेकिन सत्ता में आने के बाद तालिबान ने एक अलग पॉलिसी अपनाई है।
Durand Line Conflict: 55 सैनिकों के मारे जाने का दावा – सच क्या है?
अफ़गानिस्तान ने दावा किया है कि इस लड़ाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। हालांकि, पाकिस्तान ने इतने बड़े नुकसान की ऑफिशियली पुष्टि नहीं की है। दोनों देश अलग-अलग आंकड़े बता रहे हैं, जिससे जमीनी हकीकत छिप रही है।
मिलिट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह आंकड़ा सही है, तो यह सालों में बॉर्डर पर हुई सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक हो सकती है।
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Durand Line Conflict: क्षेत्रीय और ग्लोबल असर
यह लड़ाई सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगी। दक्षिण एशिया पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहा है। अगर यह लड़ाई लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
चीन, अमेरिका और रूस जैसे बड़े देश इन डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रहे हैं। पाकिस्तान का करीबी साथी चीन इस स्थिति को लेकर खास तौर पर परेशान है।
Durand Line Conflict: क्या स्थिति युद्ध की ओर बढ़ रही है?
एनालिस्ट का कहना है कि हालांकि दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर युद्ध की संभावना कम है, लेकिन हमलों और जवाबी हमलों में लगातार बढ़ोतरी से स्थिति खतरनाक हो सकती है। बॉर्डर पर सैनिकों को तैनात किया जा रहा है, और हवाई निगरानी बढ़ा दी गई है। अगर जल्द ही डिप्लोमैटिक बातचीत नहीं हुई, तो यह लड़ाई और भी गंभीर लड़ाई में बदल सकती है।
Durand Line Conflict: जनता में डर और अनिश्चितता
पेशावर और बॉर्डर इलाकों में लोग डरे हुए हैं। स्कूल बंद कर दिए गए हैं, और कई परिवार सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर घूम रहे वीडियो और फोटो हालात की गंभीरता दिखाते हैं। लोगों का एक ही सवाल है कि, क्या यह सिर्फ एक छोटी लड़ाई है या आने वाले बड़े युद्ध का इशारा है?
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