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Lokhitkranti > पश्चिम बंगाल > केरल बना ‘केरलम’, लेकिन ‘बांग्ला’ पर चुप क्यों केंद्र? ममता बनर्जी ने दोहरे रवैये पर उठाया सवाल
पश्चिम बंगाल

केरल बना ‘केरलम’, लेकिन ‘बांग्ला’ पर चुप क्यों केंद्र? ममता बनर्जी ने दोहरे रवैये पर उठाया सवाल

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-02-25 8:52 अपराह्न
By Lokhit Kranti 6 महीना ago
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Mamata Delimitation Controversy
Mamata Delimitation Controversy: परिसीमन पर ममता बनर्जी का बड़ा हमला, बंगाल को बांटने की साजिश का आरोप
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Mamata Banerje on BJP: देश की राजनीति में एक बार फिर पहचान बनाम राजनीति की बहस तेज हो गई है. केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जिसे सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा कदम बताया जा रहा है. लेकिन इसी फैसले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है जब केरलम को मंजूरी मिल सकती है, तो ‘बांग्ला’ क्यों अटका हुआ है?

Contents
क्या है ‘केरलम’ फैसले का मतलब?‘बांग्ला’ पर केंद्र की हिचकिचाहट क्यों?प्रशासनिक चुनौतियां भी बड़ी वजहइतिहास भी बना हुआ है बाधापहचान की लड़ाई या चुनावी रणनीति?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इस फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही केंद्र पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया. उनका कहना है कि उनकी सरकार ने जुलाई 2018 में ही राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया.

क्या है ‘केरलम’ फैसले का मतलब?

केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के बाद अब केरल का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया शुरू होगी. हालांकि, इसे लागू करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी. माना जा रहा है कि यह कदम राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के तौर पर उठाया गया है.राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं, जहां क्षेत्रीय भावनाओं को साधने की कोशिश हो सकती है. ‘मेरे प्रस्ताव पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया’

इस फैसले के बाद Mamata Banerjee ने कहा, ‘हमने 2018 में ही राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया.’ उनका आरोप है कि केंद्र सरकार एक राज्य को सांस्कृतिक पहचान देने के नाम पर आगे बढ़ रही है, जबकि दूसरे राज्य के समान प्रस्ताव को नजरअंदाज किया जा रहा है.

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‘बांग्ला’ पर केंद्र की हिचकिचाहट क्यों?

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल का नाम ‘बांग्ला’ करने के पक्ष में फिलहाल नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संभावित भ्रम मानी जा रही है. ‘बांग्ला’ नाम पड़ोसी देश Bangladesh से काफी मिलता-जुलता है. ऐसे में विदेश मंत्रालय पहले ही इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है. (Mamata Banerjee on BJP)

Mamata Banerjee on BJP
Mamata Banerjee on BJP

प्रशासनिक चुनौतियां भी बड़ी वजह

किसी राज्य का नाम बदलना सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं होता. इसके लिए रेलवे, डाक, उड्डयन और कई अन्य विभागों में बदलाव करने पड़ते हैं. साथ ही संसद में सामान्य बहुमत से बिल पारित कराना भी अनिवार्य होता है. यानी यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जिसमें ऐतिहासिक और प्रशासनिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखना होता है. (Mamata Banerjee on BJP)

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इतिहास भी बना हुआ है बाधा

1947 के विभाजन के बाद बंगाल दो हिस्सों में बंट गया थापूर्वी और पश्चिमी. बाद में 1971 में पूर्वी बंगाल अलग होकर Bangladesh बन गया, जबकि भारत में पश्चिम बंगाल नाम बरकरार रहा. अब राज्य सरकार इसे बदलकर ‘बांग्ला’ करना चाहती है, लेकिन केंद्र ऐतिहासिक संदर्भों और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाए हुए है. (Mamata Banerjee on BJP)

Mamata Banerjee on BJP
Mamata Banerjee on BJP

पहचान की लड़ाई या चुनावी रणनीति?

केरलम बनाम बांग्ला की बहस ने यह सवाल खड़ा कर दिया हैक्या राज्यों के नाम बदलना सिर्फ सांस्कृतिक पहचान का सम्मान है या फिर यह चुनावी राजनीति का नया औजार बन चुका है? आने वाले समय में संसद का रुख ही तय करेगा कि यह बहस पहचान की जीत होगी या राजनीति की. (Mamata Banerjee on BJP)

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