Devendra Fadnavis Emotional Tribute: महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र उस समय भावनाओं से भर उठा, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उप मुख्यमंत्री रहे अजित पवार को याद करते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। सदन में शोक प्रस्ताव (Devendra Fadnavis Emotional Tribute) पर बोलते हुए फडणवीस कई बार रुके, आवाज भर्रा गई और माहौल गंभीर हो गया। यह सिर्फ एक राजनीतिक सहयोगी को श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि एक मित्र, सहयात्री और लंबे समय तक साथ काम करने वाले साथी को अंतिम नमन था।
महाकवि भास के श्लोक से दी श्रद्धांजलि
फडणवीस ने अपने संबोधन (Devendra Fadnavis Emotional Tribute) में संस्कृत साहित्य का उल्लेख करते हुए महाकवि भास के नाटक स्वप्नवासवदत्तम् का एक सुभाषित उद्धृत किया। उन्होंने कहा, ‘लकड़ी जलती है तो आग केवल शरीर को जलाती है, लेकिन मित्र का शोक हृदय और आत्मा को भी जला देता है।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि अजित पवार के निधन के बाद आज वे स्वयं इसी भाव को महसूस कर रहे हैं। ‘अजितदादा जैसा सच्चा मित्र और सहयात्री खोना केवल राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि हमारे हृदय को पीड़ा देने वाली घटना है। कुछ घावों पर समय मरहम लगा देता है, लेकिन यह दुख कभी कम नहीं होगा।’
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‘बगल की सीट पर अब सन्नाटा है’
फडणवीस ने कहा कि सदन में बोलना (Devendra Fadnavis Emotional Tribute) कहां से शुरू करें, यह समझ नहीं आ रहा। “मन में एक तूफान है। कभी कल्पना नहीं की थी कि ऐसे शोक प्रस्ताव पर बोलना पड़ेगा।’ उन्होंने याद किया कि विधानसभा में उनकी बगल की सीट पर अक्सर अजित दादा बैठे होते थे। सुबह से देर रात तक चलने वाली कार्यवाही में वे अपनी जगह पर डटे रहते थे। ‘आज जब नजर उस ओर जाती है, तो खालीपन साफ दिखाई देता है।’
12वां और 13वां बजट… अधूरी रह गई पारी
मुख्यमंत्री (Devendra Fadnavis Emotional Tribute) ने बताया कि इस वर्ष अजित पवार अपना 12वां बजट पेश करने वाले थे और अगले वर्ष 13वां बजट प्रस्तुत कर पूर्व वित्त मंत्री शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर सकते थे। संभव था कि वे राज्य के इतिहास में सबसे अधिक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री बनते। ‘लेकिन उनके अचानक निधन के कारण अब बजट पेश करने की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई है।’ यह जिम्मेदारी उनके लिए सिर्फ प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि एक भावनात्मक चुनौती भी है।
कठिन फैसलों से कभी पीछे नहीं हटे
फडणवीस ने अजित पवार के कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि वे कठिन निर्णय लेने से कभी नहीं घबराते थे। ‘लाडकी बहिन’ योजना पर वित्तीय बोझ को लेकर जब पुनर्विचार की चर्चा हुई, तब भी उन्होंने ठोस निर्णय लेकर उसे मंत्रिमंडल के सामने रखा। उन्होंने कहा, योजना लागू होने के बाद उनका गुलाबी जैकेट पहनना और अन्य मंत्रियों को भी पहनाना, आज एक याद बन चुका है। ‘ये छोटी-छोटी बातें ही किसी व्यक्ति को हमारे दिल के करीब बनाती हैं’
राजनीति से परे एक मित्रता
फडणवीस ने कहा कि अक्सर हम किसी नेता के निधन (Devendra Fadnavis Emotional Tribute) पर कहते हैं कि ‘एक जगह खाली हो गई’, लेकिन जब अजितदादा जैसे प्रभावशाली और मजबूत नेतृत्व वाला व्यक्ति चला जाता है, तब इस वाक्य का असली अर्थ समझ में आता है। उनका जाना केवल एक संवैधानिक पद का रिक्त होना नहीं, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में एक स्थायी शून्य का बन जाना है। ‘यह क्षण मेरे लिए अत्यंत व्यक्तिगत और भावनात्मक है।’
सदन में छाया मौन, बाहर उमड़ा जनसैलाब
सदन के भीतर शोक प्रस्ताव (Devendra Fadnavis Emotional Tribute) पर गहरा मौन रहा, जबकि बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी भावनात्मक माहौल देखा गया। अजित पवार को एक मजबूत प्रशासक और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में याद किया जा रहा है। राजनीतिक मतभेदों से परे, उनके निधन ने राज्य की राजनीति को एकजुट कर दिया है। फडणवीस का भाषण इस बात का संकेत था कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भी व्यक्तिगत संबंध कितने गहरे हो सकते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में यह क्षण केवल एक श्रद्धांजलि का नहीं, बल्कि उस दौर के अंत का संकेत भी है, जिसमें दो अनुभवी नेता साथ मिलकर राज्य की दिशा तय कर रहे थे। अब वह सीट खाली है और उसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
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