Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है। इस वर्ष Mahashivratri 2026 का व्रत 15 फरवरी, रविवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस विशेष रात्रि में भगवान शिव जागृत अवस्था में रहते हैं और सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार करते हैं।
इस बार की Mahashivratri 2026 और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 19 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस दिन महासिद्धि लक्ष्मी योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह योग शिव कृपा के साथ-साथ धन, वैभव और पारिवारिक सुख के लिए अत्यंत शुभ संकेत देता है।
महासिद्धि लक्ष्मी योग क्यों है खास?
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार ग्रहों की स्थिति ऐसी बन रही है जो लक्ष्मी योग का निर्माण कर रही है। यह योग आर्थिक उन्नति, नए अवसरों और पारिवारिक सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। इसी कारण इस महाशिवरात्रि पर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए विशेष उपाय करने की सलाह दी जा रही है।
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पत्नी का सम्मान क्यों माना गया शुभ?
भारतीय परंपरा में पत्नी को गृहलक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि यदि घर की स्त्री प्रसन्न रहती है तो परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इस महाशिवरात्रि, लक्ष्मी योग के दौरान यदि पति अपनी पत्नी का सम्मान करते हैं और उन्हें स्नेहपूर्वक कोई उपहार देते हैं, तो इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि छोटे-से-छोटे उपहार में भी भावनाओं की सच्चाई महत्वपूर्ण होती है। उपहार की कीमत नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्रेम का महत्व अधिक माना जाता है।
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हरी चूड़ियां- समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक
Mahashivratri 2026 के दिन पत्नी को हरी चूड़ियां भेंट करना शुभ माना जाता है। ज्योतिष में हरा रंग बुध ग्रह से जुड़ा है, जो बुद्धि, व्यापार और सकारात्मकता का प्रतीक है। मान्यता है कि हरी चूड़ियां घर में सुख-शांति और समृद्धि का संदेश लाती हैं। कई लोग इस दिन चूड़ियों को पहले पूजाघर में रखकर भगवान शिव और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं, फिर श्रद्धा से पत्नी को पहनाते हैं। इसे सौभाग्य बढ़ाने वाला उपाय माना जाता है।
सिंदूर और चांदी के आभूषण का महत्व
Mahashivratri 2026 पर पति द्वारा पत्नी की मांग में सिंदूर भरना भी विशेष महत्व रखता है। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि वैवाहिक बंधन की मजबूती का प्रतीक है। इसके अलावा, चांदी की पायल या बिछिया उपहार में देने की भी परंपरा है। ज्योतिष शास्त्र में चांदी को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है, और चंद्रमा का संबंध शीतलता और मानसिक संतुलन से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चांदी के आभूषण घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में सहायक होते हैं।
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आर्थिक परेशानियों से राहत के लिए उपाय
जो लोग लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों, कर्ज या व्यवसायिक नुकसान से जूझ रहे हैं, उनके लिए भी यह दिन विशेष माना गया है। मान्यता है कि इस दिन घर में शिवलिंग स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करने और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
कुछ ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि Mahashivratri 2026 की रात शिव-पार्वती का संयुक्त पूजन कर घर की आर्थिक उन्नति की कामना करनी चाहिए। साथ ही, परिवार में आपसी मतभेद दूर करने का संकल्प लेना भी शुभ माना जाता है।
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श्रद्धा और विश्वास सबसे बड़ा उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्रत या उपाय का फल तभी मिलता है जब उसे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए। Mahashivratri 2026 केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरण का भी अवसर है। इस बार बन रहा महासिद्धि लक्ष्मी योग भक्तों के लिए विशेष संदेश लेकर आया है—रिश्तों में प्रेम बढ़ाएं, स्त्रियों का सम्मान करें और सकारात्मक सोच अपनाएं। यदि इस पावन अवसर पर सच्चे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के द्वार खुल सकते हैं।
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