Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत देते हुए भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चुनावी जीत पर उसके कार्यकारी प्रमुख Tarique Rahman को बधाई दी है। पीएम मोदी का यह संदेश न सिर्फ एक औपचारिक शुभकामना है, बल्कि इसे दक्षिण एशिया की कूटनीति में नए संतुलन की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।
मोदी का संदेश: लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि यह जीत तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता (Bangladesh Election 2026) के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि वे तारिक रहमान के साथ मिलकर भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने साझा विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान भारत की ओर से संतुलित और रणनीतिक संदेश है, जो बदलते राजनीतिक परिदृश्य में रिश्तों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश दर्शाता है।
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13वें संसदीय चुनाव में BNP की बड़ी बढ़त
बांग्लादेश में 12 फरवरी को 13वें संसदीय चुनाव आयोजित किए गए। यह चुनाव 2024 के व्यापक जनआंदोलनों के बाद पहली बार कराए गए थे, इसलिए इन्हें बेहद अहम माना जा रहा था। चुनाव अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार Muhammad Yunus की निगरानी में संपन्न हुए। इस बार मतदाताओं ने दो स्तरों पर मतदान किया , नई संसद के गठन के लिए, संविधान में प्रस्तावित संशोधनों, जिन्हें ‘जुलाई चार्टर’ कहा जा रहा है, पर अपनी राय देने के लिए। BNP नेता तारिक रहमान ने दो सीटों ढाका-17 और बोगुरा-6 से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत का दावा किया। यह परिणाम पार्टी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
नेतृत्व परिवर्तन के बाद पहली बड़ी परीक्षा
तारिक रहमान, पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia के पुत्र हैं। 9 जनवरी को अपनी मां के निधन के कुछ समय बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की कमान संभाली थी। ऐसे में यह चुनाव उनके नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा था। चुनावी जीत के दावे के बाद BNP समर्थकों में उत्साह देखा गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह परिणाम देश में बदलाव की जनता की इच्छा को दर्शाता है।
अवामी लीग की गैर-मौजूदगी और सियासी विवाद
इस चुनाव (Bangladesh Election 2026) की एक बड़ी चर्चा यह भी रही कि सत्तारूढ़ रही Awami League को चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिली। पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina, जो इस समय देश से बाहर हैं, ने चुनाव को ‘सिर्फ एक दिखावा’ करार दिया है। अवामी लीग की गैर-मौजूदगी ने चुनाव की निष्पक्षता और व्यापक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि अंतरिम प्रशासन ने इसे पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव बताया है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?
बांग्लादेश भारत का अहम पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार है। व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग रहा है। ऐसे में नई राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा पर सबकी नजर रहेगी। माना जा रहा है कि भारत की प्राथमिकता स्थिर और सहयोगी बांग्लादेश रहेगी, चाहे वहां की सत्ता किसी भी पार्टी के हाथ में हो। पीएम मोदी का बधाई संदेश इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे की राह
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनावी नतीजों के बाद बांग्लादेश (Bangladesh Election 2026) में राजनीतिक स्थिरता कितनी जल्दी स्थापित होती है। साथ ही, संविधान संशोधन पर जनमत और नई संसद की भूमिका भी अहम होगी। तारिक रहमान के सामने चुनौती होगी कि वे चुनावी वादों को ठोस नीतियों में बदलें और देश में विश्वास बहाल करें। वहीं भारत की नजर इस बात पर रहेगी कि द्विपक्षीय सहयोग की मौजूदा गति बरकरार रहे। दक्षिण एशिया की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में नई दिशा तय कर सकता है।
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