Uttarakhand Republic Day: देशभर के साथ उत्तराखंड में भी 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह, गौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। राजधानी देहरादून में मुख्यमंत्री आवास और लोकभवन में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रमों ने इस राष्ट्रीय पर्व को और अधिक गरिमामय बना दिया। खास बात यह रही कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस के साथ-साथ राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का ऐतिहासिक अवसर भी पूरे देश में उत्सव के रूप में मनाया गया, जिससे कार्यक्रमों की भावनात्मक गूंज और गहरी हो गई।
सोमवार सुबह ठीक 9 बजे मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आवास परिसर में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को संविधान की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी को Uttarakhand Republic Day की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन हमारे लोकतांत्रिक ढांचे, संविधान की सर्वोच्चता और राष्ट्र की एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हमें न केवल अधिकार देता है, बल्कि कर्तव्यों का भी बोध कराता है, जिन्हें निभाकर ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।
लोकभवन में राज्यपाल का संदेश, शहीदों को नमन
मुख्यमंत्री आवास के बाद सुबह 9:30 बजे लोकभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने ध्वजारोहण किया। Uttarakhand Republic Day अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों और देश के नागरिकों को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में राज्यपाल ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके त्याग और बलिदान के कारण ही आज भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और सशक्त राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर खड़ा है।
राज्यपाल ने कहा कि Uttarakhand Republic Day का दिन अमृत काल के संकल्पों को याद करने और राष्ट्र निर्माण के नए लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधान के मूल्यों को आत्मसात करते हुए देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
भारत की वैश्विक प्रगति पर राज्यपाल का फोकस
अपने भाषण में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने भारत की वैश्विक उपलब्धियों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप इकोसिस्टम, रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष विज्ञान, हरित ऊर्जा और सैन्य क्षमता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक भरोसेमंद और मजबूत साझेदार के रूप में स्थापित किया है।
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उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जो प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व की बात है। इस क्रम में राज्यपाल ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू किए जाने को ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उनके अनुसार, यह निर्णय संविधान की भावना के अनुरूप है और इससे महिलाओं को समानता, सुरक्षा और न्याय का मजबूत कानूनी आधार मिला है।
तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन जरूरी
राज्यपाल ने अपने संबोधन में तकनीकी विकास पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी आने वाले समय की वास्तविकता हैं, लेकिन तकनीक को लक्ष्य नहीं, बल्कि साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और अधिक सशक्त बनाना होना चाहिए, तभी प्रगति सार्थक मानी जाएगी।
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विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड का संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संदेश में कहा कि Uttarakhand Republic Day हमारे संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का पर्व है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, संविधान निर्माताओं और राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा ही हमारे लोकतंत्र की आत्मा हैं।
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मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा 21वीं सदी के तीसरे दशक को ‘उत्तराखंड का दशक’ बताए जाने को प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
77वें Uttarakhand Republic Day पर उत्तराखंड में आयोजित इन कार्यक्रमों ने न केवल राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और समावेशी विकास के प्रति जनमानस में नई ऊर्जा और चेतना का संचार भी किया।
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