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उत्तर प्रदेश

Prayagraj News: कैसे बन गए शंकराचार्य? 24 घंटे में देना होगा जवाब, मेला प्रशासन ने भेजा नोटिस

Kannu
Last updated: 2026-01-20 8:01 अपराह्न
Kannu Published 2026-01-20
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Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy
Prayagraj News: कैसे बन गए शंकराचार्य? 24 घंटे में देना होगा जवाब, मेला प्रशासन ने भेजा नोटिस
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Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy : प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर 24 घंटे में जवाब देने को कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद उन्होंने अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ कैसे लगाया। प्राधिकरण ने साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य नहीं हो सकता।

Contents
Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: मौनी अमावस्या में शोभायात्रा रोकी गईAvimukteshwaranand Shankaracharya controversy:प्रशासन का पक्षAvimukteshwaranand Shankaracharya controversy: शिष्यों और पुलिस के बीच झड़पAvimukteshwaranand Shankaracharya controversy: सुप्रीम कोर्ट की रोकAvimukteshwaranand Shankaracharya controversy: भविष्य की व्यवस्थाAvimukteshwaranand Shankaracharya controversy: श्रद्धालुओं की भीड़Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: विवाद की गहराई

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला में अपने शिविर और बोर्ड पर अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ अंकित कर रखा था। प्राधिकरण ने नोटिस में कहा कि इसे तुरंत हटाएं और कारण बताएं। यह नोटिस मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद आया है, जब स्वामी और उनके शिष्यों का मेला प्रशासन के अधिकारियों के साथ झगड़ा हुआ था।

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Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: मौनी अमावस्या में शोभायात्रा रोकी गई

माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम स्नान के लिए अपने शिष्यों के साथ निकले थे। वे पहिया लगी पालकी पर सवार होकर संगम तक जाना चाहते थे। इसी दौरान प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इस पर स्वामी और उनके शिष्यों ने विरोध किया।

स्वामी का कहना था कि उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया और उनके शिष्यों पर मारपीट हुई। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अधिकारियों द्वारा माफी नहीं दी जाती और उन्हें संगम स्नान का मौका नहीं मिलता, तब तक वह अपने शिविर के बाहर ही रहेंगे।

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Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy:प्रशासन का पक्ष

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि स्वामी को स्नान करने से नहीं रोका गया। प्रशासन का कहना है कि आपत्ति सिर्फ पहिया लगी पालकी पर थी। उस समय घाट पर भारी भीड़ थी। यदि स्वामी और उनके शिष्य पालकी में सवार होकर आगे बढ़ते, तो भगदड़ या कोई दुर्घटना हो सकती थी। प्रशासन ने यह भी बताया कि सुरक्षा के कारण ही यह कदम उठाया गया। किसी भी श्रद्धालु की जान जोखिम में नहीं डालने के लिए यह निर्णय लिया गया।

Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी के शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प हुई। शिष्यों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। कुछ शिष्यों को हिरासत में लिया गया। स्वामी और उनके शिष्यों का कहना था कि यह अत्याचार है। वहीं, प्रशासन ने कहा कि यह कदम सुरक्षा के लिए उठाया गया था।

स्वामी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर विरोध जताते हुए अपने शिविर के गेट पर धरना शुरू कर दिया। शिष्यों पर बैरिकेड तोड़ने का भी आरोप लगा। इस झड़प के बाद माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे।

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Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: सुप्रीम कोर्ट की रोक

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। साल 2022 में कोर्ट ने कहा था कि जब तक मामला निपट नहीं जाता, तब तक स्वामी का शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं किया जा सकता।

मेला प्राधिकरण ने नोटिस में यही कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद स्वामी ने अपने नाम के आगे शंकराचार्य लगाना गलत है। विधिक राय के अनुसार ज्योतिषपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में अभी स्वामी को कोई अधिकार नहीं मिला है।

Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: भविष्य की व्यवस्था

प्राधिकरण ने कहा कि स्वामी और उनके शिष्यों को निर्देशित किया गया है कि 24 घंटे के अंदर नोटिस का जवाब दें। इसके साथ ही नाम से ‘शंकराचार्य’ हटाने का आदेश भी दिया गया है। स्वामी ने साफ कहा है कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता और संगम स्नान नहीं कराता, तब तक वह और उनके शिष्य धरने पर रहेंगे। भविष्य में भी यदि वे प्रयागराज आए, तो शिविर के बाहर ही रहेंगे और स्नान नहीं करेंगे।

Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: श्रद्धालुओं की भीड़

2026 के माघ मेले में अब तक करोड़ों श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं। हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु घाट पर उमड़ते हैं। मौनी अमावस्या पर भी भारी भीड़ थी। इस कारण प्रशासन ने सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए।

Avimukteshwaranand Shankaracharya controversy: विवाद की गहराई

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध मौनी अमावस्या से ही जारी है। प्रशासन और शिष्यों के बीच झड़प, कोर्ट का रोक आदेश और नोटिस ने विवाद को और बढ़ा दिया है। माघ मेले का समापन महाशिवरात्रि पर होगा। इस दौरान अखाड़ों का अंतिम स्नान होता है।

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